चीन के शेयर बाजार में 2005 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट, 329 लाख करोड़ डूबे,जानें 3 कारण


चीन के शेयर बाजार में 2005 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट, 329 लाख करोड़ डूबे,जानें 3 कारण

मनोज बिसारिया | 30 Oct 2026

 

न‌ई दिल्ली।ग्लोबल मार्केट के साथ-साथ चीन के शेयर बाजार में भी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है।चीन के शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स सीएसआई 300 लगातार 12वें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ है,ऐसा चीन के शेयर बाजार के इतिहास में पहली बार हुआ है। 30 अक्टूबर के बंद भाव के आधार पर यह इंडेक्स 2005 में शुरू होने के बाद सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट के दौर में है।शेयर बाजार में बिकवाली के बीच मई के शिखर से चीन के शेयर बाजार में करीब 3.5 लाख करोड़ डॉलर यानी 329 लाख करोड़ रूपए स्वाहा हो गए हैं।लगातार गिरावट की कहानी सिर्फ कमजोर शेयर कीमतों की नहीं है।निवेशकों को चीन की घरेलू मांग,कंपनियों के मुनाफे,प्रॉपर्टी बाजार और टेक कंपनियों पर किए जा रहे भारी खर्च को लेकर चिंता है।सरकारी मदद की उम्मीद भी बाजार को संभालने के लिए काफी नहीं पड़ रही।

सीएसआई 300 शंघाई और शेनझेन एक्सचेंज में लिस्टेड 300 बड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स है। 23 अक्टूबर तक यह लगातार 11 हफ्ते गिर चुका था। 30 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में भी इंडेक्स नीचे रहा,इसमें गिरावट का सिलसिला 12 हफ्ते से जारी है,इससे पहले 11 हफ्ते की गिरावट का रिकॉर्ड बना था।इंडेक्स जून के शिखर से 20 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आया है।

चीन का प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट  कुछ सेक्टर्स में बेहद मजबूत है,लेकिन देश के भीतर लोगों को महंगाई चोट पहुंचा रही है, उन्होंने खर्च करना कम कर दिया है।ऐसे में निवेशकों को चिंता है कि जब घरेलू डिमांड कमजोर है, तो कंपनियों के लिए सेल्स बढ़ाना और कीमतें बढ़ाकर मुनाफा कमाना बेहद मुश्किल हो जाएगा,इसीलिए निवेशक जमकर बेच रहे हैं।
कंपनियों के बीच तगड़ा कॉम्पिटिशन भी मुनाफे पर दबाव डाल रहा है,कई कारोबारों में कंपनियां बाजार हिस्सेदारी बचाने के लिए कीमतें घटा रही हैं।

इससे सेल्स तो बनी रह सकती है,लेकिन हर बिक्री पर बचने वाला मुनाफा कम हो जाता है,इसका असर बैंकिंग,इलेक्ट्रिक व्हीकल और टेक्नोलॉजी जैसे अलग-अलग सेक्टर्स की कंपनियों पर पड़ रहा है।

तीसरी तिमाही के नतीजों ने बाजार को बेहद निराश किया। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती हैं कि नतीजे घोषित कर चुकी एमएससीआई चाइना इंडेक्स की कंपनियों ने औसतन बाजार के अनुमान से करीब 9 प्रतिशत कम पर आमदनी और पॉप्रिट हुआ है।इसका मतलब है कि शेयर बाजार की उम्मीदें पहले से घटने के बावजूद कंपनियों के नतीजे उन अनुमानों से भी कमजोर रहे।

चीन के टेक और एआई शेयरों ने तो निवेशकों की कमर तोड़ दी है।निवेशक यह परख रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)पर कंपनियों का बड़ा खर्च फ्यूचर्स में पर्याप्त कमाई देगा या नहीं।जब कमाई की संभावना साफ न हो तो ऐसे  में निवेशकों का शेयर बेचना लाजमी है।इस चिंता निवेशकों के होश उड़ा दिए है।टेक्नोलॉजी शेयरों वाले स्टार 50 इंडेक्स में भारी गिरावट आई और एआई हार्डवेयर तथा सेमीकंडक्टर कंपनियां दबाव में है‌।अमेरिका के टेक शेयरों में आई बिकवाली ने भी एशिया के बाजारों में टेक शेयरों पर दबाव बढ़ाया।

चीन का प्रॉपर्टी बाजार लंबे समय से सुस्ती से गुजर रहा है। घरों और रियल एस्टेट से जुड़े कारोबार में कमजोरी लोगों के भरोसे और खर्च पर असर डाल रहे हैं।निवेशक यह भी देख रहे हैं कि इस सुस्ती से बाहर निकलने के लिए सरकार कितनी बड़ी मदद देती है।बीजिंग ने बाजार को सहारा देने के लिए कदम उठाए हैं,लेकिन निवेशकों को अब तक बड़े राहत पैकेज की उम्मीद थी,उन्हें लग रहा है कि सरकार की मौजूदा मदद घरेलू डिमांड और कंपनियों की कमाई को तेजी से बढ़ाने के लिए पूरा नहीं है।चीन की अर्थव्यवस्था तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 4.5 प्रतिशत बढ़ी,लेकिन इस ग्रोथ से शेयर बाजार का भरोसा नहीं लौटा।

ब्लूमबर्ग के डेटा बताते हैं कि शेयर बाजार की कुल वैल्यू मई के शिखर से करीब 3.5 ट्रिलियन डॉलर कम हुई है। 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 1 लाख करोड़ डॉलर।ऐसे में हम अगर 3.5 ट्रिलियन डॉलर को ₹94 प्रति डॉलर से बदले तो यह रकम करीब ₹329 लाख करोड़ होती है।हालांकि, इस टेंशन भरे माहौल में भारत की अच्छी आर्थिक ग्रोथ एफआईआई और अन्य निवेशकों को भारत में पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।


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