नई दिल्ली।बढ़ती महंगाई के बीच रसोई का बजट संभालना किसी रॉकेट साइंस से कम नहीं है।आप बाजार में सब्जी या ग्रॉसरी खरीदने जाते हैं तो पैसा पानी की तरह खर्च हो जाता है और जेब खाली हो जाती है,लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आपकी शाकाहारी थाली (वेज प्लेट), नॉन-वेज के मुकाबले तेजी से महंगी हो रही है।यह सुनकर आप अचंभित हो सकते हैं,लेकिन आंकड़े तो यही बयां कर रहे हैं।हालांकि, नॉन-वेज आइटम को हमेशा से ही वेज से महंगा माना जाता रहा है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक...
क्रिसिल इंटेलिजेंस की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में घर पर तैयार होने वाली वेज थाली का दाम पिछले साल के मुकाबले पूरा 10 प्रतिशत बढ़ गया है।दूसरी तरफ नॉन-वेज थाली की बात करें तो इसमें केवल 6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।आखिर नॉन-वेज के मुकाबले वेज थाली महंगी होने का कारण क्या है।
आंकड़ों के आधार पर बात करें तो सितंबर महीने में...
आंकड़ों के आधार पर बात करें तो सितंबर महीने में एक घर में तैयार होने वाली वेज थाली की कीमत बढ़कर 30.80 रुपये पर पहुंच गयी।पिछले साल इसी समय इसकी कीमत 28.10 रुपये थी।दूसरी तरफ नॉन-वेज थाली की कीमत 56 रुपये से बढ़कर 59.50 रुपये पर पहुंच गयी है।आप भी सोच रहे होंगे कि नॉन-वेज थाली पहले ही वेज से करीब दोगुने कीमत की है तो फिर नॉन-वेज के मुकाबले वेज थाली महंगी होने की रफ्तार ज्यादा कैसे हुई।मामला यह नहीं है कि कौन सी थाली सस्ती है या कौन सी महंगी।मामला यह है कि वेज थाली की कीमत जिस रफ्तार से बढ़ रही है, वो वाकई में चिंता बढ़ाने वाली है।नॉन-वेज की कीमत भले ही ज्यादा हो,लेकिन पिछले एक साल में प्रतिशत के तौर पर देखें तो उसकी कीमत उतनी तेजी से नहीं बढ़ी जितनी तेजी से दाल-रोटी और सब्जी वाले खाने की की भागी है।आइए जानते हैं वेज थाली महंगी होने का कारण।
प्याज ने बिगाड़ा पूरा खेल
महंगाई की इस कहानी में सबसे बड़ी विलेन बनी है रसोई की रानी प्याज।सितंबर में प्याज की कीमत साल-दर-साल बढ़कर सीधे 89 प्रतिशत उछाल के साथ 53 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गयी।एक साल पहले के मुकाबले प्याज की कीमत में जबरदस्त तेजी देखी गई।यह उछाल क्यों आया,इसके पीछे का कारण भी दिलचस्प है।CRISIL के मुताबिक रबी सीजन में प्याज के उत्पादन में 5 से 6 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे सप्लाई कम हो गई,इसके अलावा जून में बारिश एवरेज से 40 प्रतिशत कम रही,इस कारण प्याज की रोपाई में देरी हुई और मार्केट में नया माल आने में टाइम लग गया। मांग बढ़ी तो सप्लाई की कमी से कीमत आसमान छूने लगीं।
चावल और तेल ने भी नहीं दिया साथ
वेज थाली का जायका बिगाड़ने में प्याज के अलावा चावल और वेजिटेबल ऑयल ने भी पूरा साथ दिया है।सितंबर में चावल की कीमत में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।कम पैदावार और कमजोर यील्ड के कारण धान के उत्पादन में गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है,इसके अलावा खाने के तेल की कीमत भी 12 प्रतिशत तक बढ़ गई,इसके पीछे ग्लोबल मार्केट में चल रहीं अनिश्चितताएं और अल नीनो का पाम ऑयल प्रोडक्शन पर पड़ने वाला असर हो सकता है।इन सबके ऊंची कीमत ने रुलाया तो एलपीजी सिलेंडर भी पिछले साल के मुकाबले 10 प्रतिशत महंगा हो गया।यानी अनाज से लेकर सब्जियां और कुकिंग ऑयल से लेकर एलपीजी गैस तक,वेज थाली की कीमत बढ़ाने में सबका योगदान रहा है।
नॉन-वेज थाली पर कैसा रहा असर
सवाल यह है कि जब वेज थाली से जुड़ा हर सामान इतना महंगा हो गया तो नॉन-वेज थाली की रफ्तार धीमी क्यों रही। इसका सीधा सा जवाब है ब्रोइलर चिकन के दाम।नॉन-वेज थाली की कॉस्टिंग में आधा हिस्सा अकेले चिकन का होता है, लेकिन सितंबर में ब्रोइलर चिकन के दाम साल दर साल के आधार पर महज दो फीसदी ही बढ़े।कम चिक प्लेसमेंट, मानसून के दौरान ट्रांसपोर्ट या सप्लाई में आई मामूली रुकावट और मक्का की महंगी कीमत के बावजूद चिकन में ज्यादा उछाल देखने को नहीं मिला।हालांकि सितंबर महीने में ब्रोइलर के दाम 2 प्रतिशत जरूर बढ़े,इस कारण नॉन-वेज थाली का कुल खर्च पहले के मुकाबले 3 प्रतिशत ही बढ़ा।वेज थाली के मुकाबले यह बढ़त काफी कम रही।
आने वाले दिनों में मिलेगी राहत
आम लोगों के मन में असली सवाल यही है क्या आने वाले दिनों में इस महंगाई से कुछ राहत मिलेगी, इसका जवाब कई चीजों पर निर्भर करता है।इसका पहला कारण बाजार में ताजी प्याज की आवक कितनी रहेगी,इस पर निर्भर करता है। CRISIL का मानना है कि अक्टूबर के आखिर तक प्याज के दाम कुछ नरम पड़ सकते हैं।हालांकि त्योहारी सीजन की मांग के कारण दाम कुछ समय तक ऊंचे बने रह सकते हैं,इसके बावजूद चावल, तेल और एलपीजी पुरानी दर पर ही मिल रही है।