रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत बना सिकंदर,1600% की रफ्तार से यूरोप जा रहे मेक इन इंडिया हथियार,₹8200 करोड़ का निर्यात


रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत बना सिकंदर,1600% की रफ्तार से यूरोप जा रहे मेक इन इंडिया हथियार,₹8200 करोड़ का निर्यात

मनोज बिसारिया | 30 Oct 2026

 

नई दिल्ली।एक तरफ जहां रूस और यूक्रेन में युद्ध हो रहा था तो वहीं दूसरी ओर भारत से भर भरकर हथियार,गोला-बारूद यूरोप पहुंच रहे थे।युद्ध के एक ओर भारत का दशकों पुराना मित्र राष्ट्र रूस है तो वहीं दूसरी ओर यूक्रेन,जिसकी मदद अमेरिका और यूरोपीय यूनियन कर रहे हैं।इस युद्ध के शुरू होने के बाद भारत से यूरोप पहुंचने वाली हथियारों की खेप में 1600 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।ये दावा ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में की है। 

मदर ऑफ ऑल डील से पहले यूरोप पहुंची हथियारों की बड़ी खेप

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील फाइनल हो चुकी है।दिसंबर 2026 में ये डील साइन होने वाली है।मार्च-अप्रैल 2027 से ये डील प्रभावी हो जाएगी। 27 देशों के समूह के साथ भारत के लिए एक विशाल बाजार तैयार हो जाएगा। India-EU Trade डील से पहले एक और बड़ी रिपोर्ट सामने आई है।ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 2022 में रूस-यूक्रेन वॉर शुरू होने के बाद भारत से यूरोप को हथियार सप्लाई में 1600 प्रतिशत का उछाल आया है।

यूरोप का बड़ा आर्म्स सप्लायर बना भारत  

युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है,जो भारत कभी हथियार और डिफेंस का आयातक था,आज वही भारत विश्व के बड़े डिफेंस सप्लायर के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है।भारत के डिफेंड एक्सपोर्ट की डिटेल जानने से पहले ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट समझते हैं...

यूरोप में मेड इन इंडिया हथियारों की बढ़ती मांग...

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने यूरोपीय देशों को करीब 8271 करोड़ रुपये के गोला-बारूद एक्सपोर्ट किए,भारत से पूर्वी और मध्य यूरोप को भेजे गए डिफेंस एक्सपोर्ट में 1600 प्रतिशत का उछाल आया,दक्षिण कोरिया के बाद भारत यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा डिफेंस सप्लायर बन गया है, जो पहले 28वें नंबर पर था,यूरोपीय देश भारी मात्रा में भारत से नाटो-मानक गोला-बारूद, 155 MM तोप के गोले, एडवांस बारूद खरीद रहे हैं,यूरोप के अलावा भारत से इजरायल के लिए रक्षा निर्यात में भी तेजी आई है।मार्च 2026 से लेकर अब तक भारत ने इजरायल को करीब 639 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात किया है।यह भारत के पिछले 6 साल के निर्यात के बराबर है।भारत ने इजराइल को विमान,हेलिकॉप्टर और ड्रोन पार्ट्स,आर्टिलरी शेल,मोर्टार राउंड आदि की सप्लाई की है और तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है।

यूरोप में क्यों बढ़ी भारतीय हथियारों की मांग

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय गोला-बारूदों की मांग यूरोप समेत विश्वभर में बढ़ी है।युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय देशों में सेल्फ डिफेंस और हथियारों के स्टॉक भरने की होड़ मची हुई है,इन देशों ने रीआर्म यूरोप मिशन की  शुरुआत कर दी।यूक्रेन की जरूरत और अपनी रक्षा मांग को पूरा करने के लिए यूरोप में मांग बढ़ी और भारत ने इस जरूरत को बेस्ट क्वालिटी, ऑन टाइम डिलीवरी और किफायती कीमत के रक्षा उत्पादों से भरा।

भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश

भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है।भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है।पिछले 10 सालों में भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में भारी बढ़ोतरी की हुई है।

भारत के डिफेंस इंडस्ट्री पर एक नजर  

भारत के पास विशाल रक्षा उद्योग है।निजी और सरकारी कंपनियां मिलकर यहां छोटे हथियार से लेकर बड़ी मिसाइलें, तोपखाने के सिस्टम,मिसाइल सिस्टम,डिफेंस अप्लायंस, गोला-बारूद,छोटे हथियार,हेलमेट और बुलेटप्रूफ जैकेट तैयार कर घरेलू जरूरत के साथ-साथ निर्यात को बढ़ावा दे रही है।
भारत के डिफेंस इंडस्ट्री में 16 सरकारी कंपनियां  (DPSU), करीब 840 बड़ी और मीडियम साइज प्राइवेट कंपनियां (MSMEs) और लगभग 17000 छोटी कंपनियां और हाई-टेक डिफेंस स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं।

भारत 80 से अधिक देशों को बेच रहा है रक्षा उपकरण 

भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण बेच रहा है।
 यूरोप,अफ्रीका,दक्षिण पूर्व एशिया,लैटिन अमेरिका,इजरायल समेत भारत के रक्षा निर्यात का दायरा बढ़ता जा रहा है।वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का कुल रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये रखा गया, जो पिछले साल से 15.2 प्रतिशत अधिक था,जिसमें 1.39 लाख करोड़ रुपये घरेलू डिफेंस इंडस्ट्रीज के लिए अलॉट किया गया।घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता खत्म हो सके।

भारत के सबसे घातक मेड इन इंडिया हथियार

रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बन रहा है। मेक इन इंडिया की बदौलत स्वदेशी हथियार बन रहे हैं। 80 देशों को निर्यात किया जा रहा है।भारत के घातक मेड इन इंडिया हथियारों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल,इसे भारत ने रूस से साथ मिलकर तैयार किया है,अग्नि-V भारत की स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल है,जिसे DRDO ने डेवलप किया,आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम ये 96 प्रतिशत तक भारत की स्वदेशी मिसाइल है,अस्त्र मिसाइल ये पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनी मिसाइल है,पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर इसे DRDO ने तैयार किया है,एडवांस्ड टौड आर्टिलरी गन सिस्टम,ये पूरी तरह स्वदेशी मिसाइल है,एलसीए तेजस,इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है,आईएनएस विक्रांत ये भारत की पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है।इसके अलावा अर्जुन मेन बैटल टैंक, Zorawar, त्रिची असॉल्ट राइफल्स, SSS डिफेंस स्नाइपर राइफल्स जैसे तमाम डिफेंस उत्पाद भारत की मेक इन इंडिया की लिस्ट में शामिल हैं।

सिर्फ बेचता नहीं, हथियार खरीदता भी है भारत

भारत धीरे-धीरे आयात पर अपनी निर्भरता को कम कर रहा है।भारत ने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा आयात रणनीति में बदलाव किया है।सोवियत संघ और रूस से अपनी निर्भरता को कम कर भारत पश्चिमी देशों की हिस्सेदारी को बढ़ा रहा है। भारत के रक्षा आयात में फ्रांस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत , इजरायल की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है।


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