नई दिल्ली।आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का यूपीआई एमडीआर पर बड़ा बयान आया है।संजय मल्होत्रा ने कहा है कि एमडीआर का फैसला पहले ही लिया जा चुका है।कहा कि उन्हें लेनदेन की संख्या में कोई गिरावट नहीं दिखती।छोटे एमडीआर शुल्क का यूपीआई लेनदेन की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ेगा।बता दे कि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू हो रहा है।इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी,हालांकि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले भुगतान पर राशि चाहे जितनी भी हो,कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
कैसे बांटी जाएगी एमडीआर की रकम
मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है,जो डिजिटल लेनदेन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए व्यापारी भुगतान सेवा देने वाली कंपनियों को देते हैं,इससे मिलने वाली रकम यूपीआई व्यवस्था से जुड़े बैंकों और अन्य संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी।कुल एमडीआर में से 40 प्रतिशत ग्राहकों के बैंकों को, 30 प्रतिशत भुगतान गेटवे को, 20 प्रतिशत यूपीआई ऐप को और बाकी 10 प्रतिशत यूपीआई ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगा
11 देशों में स्वीकार किया जा रहा यूपीआई
यूपीआई अब 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है। उज्बेकिस्तान इस सूची में सबसे नया देश है।यूपीआई स्वीकार करने वाले अन्य देशों में सिंगापुर,संयुक्त अरब अमीरात,फ्रांस, मॉरीशस,नेपाल,भूटान,कतर,श्रीलंका,कंबोडिया और ग्रीस शामिल हैं।
एक दशक में यूपीआई लेनदेन में बड़ा उछाल
यूपीआई की शुरुआत 25 अगस्त 2016 को हुई थी,इसके बाद भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। यूपीआई के जरिए लेनदेन का मूल्य वित्त वर्ष 2017 में 0.07 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी एक दशक में इसमें 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि हुई।
पहली छमाही में 27 प्रतिशत बढ़ा यूपीआई लेनदेन
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई)के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में यूपीआई लेनदेन की संख्या करीब 145 अरब रही।यह पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल से सितंबर अवधि में 114 अरब थी। इस तरह संख्या के आधार पर इसमें 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं मूल्य के आधार पर यूपीआई लेनदेन 20 प्रतिशत बढ़कर 177 लाख करोड़ रुपये हो गया,पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 148 लाख करोड़ रुपये था।