नई दिल्ली।जापान के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दर बढ़ा दी है।शुक्रवार को बैंक ने अपनी मुख्य ब्याज दर 1 फीसदी से बढ़ाकर 1.25 फीसदी कर दी। जापान में ब्याज दर का यह स्तर 31 साल में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 1995 में ब्याज दर इस स्तर पर थी।
बता दें कि बैंक ऑफ जापान का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब विश्व में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं।इसका असर जापान पर भी पड़ रहा है, क्योंकि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है।
जापान ने क्यों बढ़ाई ब्याज दर
जापान के सामने इस समय तीन बड़ी परेशानियां हैं।येन लंबे समय से कमजोर है,चीजों के दाम बढ़ रहे हैं और देश में काम करने वाले लोगों की संख्या घट रही है। तेल और गैस की ऊंची कीमतों ने भी मुश्किल बढ़ाई है। अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही प्रभावित हुई है।इससे विश्व भर में तेल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं। जापान अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेश से खरीदता है। ऐसे में तेल और गैस महंगे होने पर जापान का आयात खर्च बढ़ता है और इसका असर आम लोगों के खर्च पर भी पड़ सकता है।
2024 से छह बार बढ़ चुकी है ब्याज दर
जापान लंबे समय तक बेहद कम ब्याज दरों के लिए जाना जाता था। 2024 में बैंक ऑफ जापान की ब्याज दर माइनस 0.1 फीसदी थी। इसके बाद बैंक ने धीरे-धीरे ब्याज दर बढ़ाना शुरू किया। पिछले ढाई साल में बैंक ऑफ जापान छह बार ब्याज दर बढ़ा चुका है और अब यह 1.25 फीसदी पर पहुंच गई है। दरअसल, जापान करीब तीन दशक तक बहुत कम महंगाई या कीमतों में गिरावट की समस्या से जूझता रहा। इसलिए वहां लंबे समय तक ब्याज दरें बेहद कम रखी गई थीं। अब हालात बदल रहे हैं और कीमतें बढ़ने लगी हैं।
महंगाई अभी कितनी है
शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में जापान की मुख्य महंगाई दर थोड़ी घटी है। यह जुलाई के 1.8 फीसदी से घटकर अगस्त में 1.7 फीसदी रह गई। हालांकि यह बैंक ऑफ जापान के 2 फीसदी के लक्ष्य के करीब बनी हुई है। दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले जापान में महंगाई बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन जापान के लिए लगातार बढ़ती कीमतें पिछले कुछ दशकों के मुकाबले बड़ा बदलाव हैं।
कमजोर येन भी बड़ी परेशानी
जापान की करेंसी येन पर पिछले कुछ महीनों से दबाव बना हुआ है। आम तौर पर ब्याज दर बढ़ने से किसी देश की करेंसी को सहारा मिल सकता है, क्योंकि वहां निवेश करना ज्यादा आकर्षक हो सकता है। अगस्त में येन 40 साल के निचले स्तर तक गिर गया था। इसके बाद जापान और अमेरिका ने मिलकर येन की गिरावट रोकने के लिए बाजार में दखल दिया था।दोनों देशों की ओर से इस तरह का साझा कदम 2011 के बाद पहली बार उठाया गया था। जापान के वित्त मंत्रालय और अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने उस समय कहा था कि जरूरत पड़ने पर दोबारा भी ऐसा कदम उठाया जा सकता है।
दुनिया भर में क्यों बढ़ रही हैं ब्याज दरें
सिर्फ जापान ही ब्याज दर नहीं बढ़ा रहा है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने बुधवार को तीन साल से ज्यादा समय बाद पहली बार ब्याज दर बढ़ाई। यूरोपीय सेंट्रल बैंक भी इसी महीने ब्याज दर बढ़ा चुका है। इसके पीछे एक बड़ी वजह ऊर्जा की बढ़ती कीमतें हैं। ईरान युद्ध और होर्मुज के रास्ते तेल की सप्लाई में दिक्कतों के कारण महंगाई दोबारा बढ़ने का खतरा पैदा हुआ है।ऐसे में दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक ऑफ जापान आने वाले महीनों में ब्याज दरों को और बढ़ाता है या 1.25 फीसदी पर कुछ समय के लिए रोकता है।