नई दिल्ली।भारत के दो सबसे बड़े व्यापार साझेदार अमेरिका और यूरोपीय संघ ने कई नियामकीय एवं गैर-शुल्क बाधाओं की ओर इशारा करते हुए चिंता जताई है।उनका कहना है कि ये बाधाएं भारत की अर्थव्यवस्था को खोलने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ जुड़ने के प्रयासों से होने वाले फायदों को कम कर रही हैं।
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा के दौरान जताई गई चिंताओं में उच्च टैरिफ,सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) उपाय,व्यापार के लिए तकनीकी बाधाएं (टीबीटी), गुणवत्ता नियंत्रण आदेश, सेवाओं एवं डिजिटल व्यापार पर पाबंदियां, स्थानीय सामग्री की जरूरतें और सरकारी खरीद में बाधाएं शामिल हैं।
अमेरिका ने अपने बयान में कहा,हालांकि व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार के प्रयासों से हम उत्साहित हैं। इनसे पारदर्शिता और अच्छे नियामकीय तौर-तरीकों को बढ़ावा मिलेगा,लेकिन भारत को शुल्कों में भारी कटौती करने,गैर-जरूरी एसपीएस एवं टीबीटी उपायों को हटाने,सेवाओं एवं डिजिटल व्यापार में बाधाएं खड़ी करने से बचने और विदेशी निर्यातकों व निवेशकों के साथ भेदभाव करने वाले नियमों को वापस लेने के लिए और कदम उठाने होंगे।
यूरोपीय संघ ने सीमा शुल्क की अनिश्चित प्रक्रियाओं,बोझिल एसपीएस जरूरतों,बौद्धिक संपदा अधिकारों एवं भौगोलिक संकेतों की सुरक्षा में कमियों और सरकारी खरीद तक पहुंच को सीमित किए जाने जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है।
यूरोपीय संघ ने भारत द्वारा गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) के बढ़ते उपयोग की ओर भी विशेष रूप से इशारा किया। उसने कहा कि इनसे घरेलू मानकों पर आधारित ऐसी जरूरतें पैदा हो रही हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय मानकों से अलग हैं और जिनका अनुपालन करना मुश्किल और बोझिल है।
यूरोपीय संघ ने कहा‘इससे भारतीय बाजार के दुनिया की अर्थव्यवस्था से और अधिक अलग-थलग होने और पिछले वर्षों में दिखी आर्थिक प्रगति के पलटने का खतरा है।हालांकि यूरोपीय संघ ने माना कि भारत ने इस मुद्दे से निपटना शुरू कर दिया है। उसने कहा कि क्यूसीओ पर नीति आयोग की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद एक सुधारात्मक प्रक्रिया शुरू की गई थी। उन सिफारिशों को पूरी तरह लागू किए जाने से कई चिंताओं को दूर किया जा सकता है।
अमेरिका ने भी भारत द्वारा कुछ क्यूसीओ को हाल में निरस्त किए जाने का स्वागत किया है।मगर उसने कहा कि अन्य क्यूसीओ से सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पादों, चिकित्सा उपकरणों और रसायनों का निर्यात लगातार प्रभावित हो रहा है।अमेरिका ने भारत से आग्रह किया कि वह हितधारकों के साथ बातचीत के लिए अधिक अवसर प्रदान करे और जांच एवं प्रमाणन की बोझिल प्रक्रिया से बचे।
भारत ने अपने नियामकीय ढांचे का बचाव करते हुए कहा कि उसके एसपीएस उपायों का मकसद सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और जैव-सुरक्षा की रक्षा करते हुए वैध व्यापार को बढ़ावा देना है। डब्ल्यूटीओ में भारत के प्रतिनिधि ने कहा, हमेशा से हमारा मकसद सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और जैव-सुरक्षा की रक्षा करते हुए वैध व्यापार को बढ़ावा देना रहा है।उन्होंने कहा भारत समय पर डब्ल्यूटीओ अधिसूचना जारी करके,डब्ल्यूटीओ सदस्यों के साथ बातचीत के जरिये और अपने एसपीएस प्रणालियों को मजबूत करते हुए पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
व्यापार के लिए तकनीकी बाधाओं के बारे में भारत ने कहा कि उसके क्यूसीओ एवं अन्य तकनीकी नियमों को वैध उद्देश्यों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें भ्रामक प्रथाओं को रोकना और मानव, पशु एवं पादप के जीवन या स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करना शामिल है।
अमेरिका ने भारत की स्थानीय सामग्री की आवश्यकताओं की भी आलोचना की है।उसने कहा है कि इससे आईसीटी वस्तुओं,सेवाओं,शराब और चिकित्सा उपकरणों सहित विभिन्न क्षेत्रों में आयातित उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम होती है।
इसमें खास तौर पर कहा गया है कि भारत को आईटी उत्पादों के लिए आयात प्रबंधन प्रणाली और रिफर्बिश्ड चिकित्सा उपकरणों के लिए लाइसेंसिंग एवं मंजूरी प्रक्रियाओं जैसे क्षेत्र विशेष के लिए उपाय डब्ल्यूटीओ की शर्तों के मुताबिक लागू करने चाहिए और उनमें घरेलू जांच जैसी अनिवार्य जरूरतें या मात्रा संबंधी पाबंदियां नहीं होनी चाहिए।
सेवा भी विवाद का एक क्षेत्र बनी हुई है।बीमा और कानूनी क्षेत्रों के हालिया उदारीकरण को स्वीकार करते हुए अमेरिका ने कहा कि कई अन्य सेवा क्षेत्रों में विदेशी भागीदारी पर रोक बरकरार है। अमेरिका ने कहा,विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान, खुदरा और ई-कॉमर्स क्षेत्रों में व्यापक प्रतिबंध विदेशी कंपनियों के लिए समान अवसर को रोकने जैसे लगते हैं।
अमेरिका ने कहा कि अधिक खुलापन विदेशी भागीदारी को बढ़ावा देगा और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत होने में मदद करेगा। अमेरिका ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 पर भारत के परामर्श का भी स्वागत किया।