दिल्ली में पेट्रोल-डीजल से लेकर सीएनजी मालवाहक गाड़ियों पर लगेगी रोक, सीएक्यूएम ने तय की समयसीमा


दिल्ली में पेट्रोल-डीजल से लेकर सीएनजी मालवाहक गाड़ियों पर लगेगी रोक, सीएक्यूएम ने तय की समयसीमा

मनोज बिसारिया | 21 Aug 2026

 

 

नई दिल्ली।एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (सीएक्यूएम) ने कहा है कि 1 जनवरी 2027 से राजधानी दिल्ली में पेट्रोल, डीजल और कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) वाले नए हल्के माल ढोने वाले वाहनों (LGV) का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। इनमें 3.5 टन तक कुल वजन वाले N1 श्रेणी के वाहन शामिल हैं। इसके अलावा, 3.5 टन से 7.5 टन के बीच वजन वाले नॉन-इलेक्ट्रिक LGV यानी N2 श्रेणी के वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर दिल्ली में 1 जनवरी 2028 से रोक लगा दी जाएगी।

दिल्ली की EV पॉलिसी के मुकाबले सीएक्यूएम के नियम ज्यादा सख्त

19 अगस्त को जारी सीएक्यूएम का आदेश दिल्ली सरकार की 30 जून को नोटिफाई की गई EV पॉलिसी के मुकाबले ज्यादा सख्त है।दिल्ली सरकार ने नियम बनाया था कि 1 जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक N1 LGV का ही नया रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।हालांकि नॉन-इलेक्ट्रिक N2 LGV पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई थी। अब सीएक्यूएम ने N2 वाहनों को भी इन पाबंदियों के दायरे में शामिल कर लिया है।
इस फैसले का असर टाटा मोटर्स,महिंद्रा एंड महिंद्रा,अशोक लेलैंड,मारुति सुजुकी और VE कमर्शियल व्हीकल्स जैसी कंपनियों पर पड़ेगा,जो नॉन-इलेक्ट्रिक N1 और N2 कमर्शियल वाहन बनाती हैं। दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में इनके पेट्रोल,डीजल और सीएनजी मॉडल नए रजिस्ट्रेशन के लिए अयोग्य हो जाएंगे।हालांकि टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा,अशोक लेलैंड की सब्सिडियरी स्विच मोबिलिटी और VE कमर्शियल व्हीकल्स जैसी कंपनियां N1 सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहन भी बेच रही हैं। यूलर मोटर्स जैसे इलेक्ट्रिक LGV स्टार्टअप भी N1 बाजार में मौजूद हैं।

सीएक्यूएम के मुताबिक...

 
सीएक्यूएम के मुताबिक नौ रजिस्टर्ड वाहन निर्माता अभी 20 इलेक्ट्रिक N1 मॉडल बेच रहे हैं।ऐसे में पाबंदियों के पहले चरण के लिए पर्याप्त प्रोडक्ट उपलब्ध हैं। N2 वाहनों के मामले में कमीशन ने ज्यादा सावधानी बरती है,क्योंकि इलेक्ट्रिक मार्केट अभी शुरुआती दौर में है।

N2 इलेक्ट्रिक वाहनों की कमी बनी वजह

सीएक्यूएम ने बताया कि 2025 में दिल्ली-एनसीआर में 2,744 N2 LGV नए रजिस्टर हुए,लेकिन इनमें से एक भी इलेक्ट्रिक नहीं था। चार वाहन निर्माताओं के पास सिर्फ छह इलेक्ट्रिक N2 मॉडल उपलब्ध थे।इसी वजह से कमीशन ने N2 सेगमेंट में सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन का नियम लागू करने से पहले कंपनियों को और समय देने का फैसला किया।टाटा मोटर्स,महिंद्रा एंड महिंद्रा,अशोक लेलैंड,मारुति सुजुकी और VE कमर्शियल व्हीकल्स ने बिजनेस स्टैंडर्ड के सवालों का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। N1 वाहनों के लिए पाबंदियां तीन चरणों में लागू की जाएंगी।सीएक्यूएम ने बताया कि 1 जनवरी 2027 से दिल्ली के नेशनल कैपिटल टेरिटरी (NCT) में नए पेट्रोल, डीजल और CNG N1 वाहनों पर रोक लगा दी जाएगी। यह रोक 1 जुलाई 2027 से ज्यादा वाहनों वाले पांच जिलों गुरुग्राम,फरीदाबाद,सोनीपत,गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर तक बढ़ा दी जाएगी।सीएक्यूएम ने बताया कि 1 जनवरी 2028 से बाकी 18 एनसीआर जिलों में भी नए पेट्रोल और डीजल N1 वाहनों पर रोक लगा दी जाएगी।इनमें हरियाणा के रेवाडी,झज्जर,रोहतक,पानीपत, पलवल,नूंह,भिवानी,चरखी दादरी,महेंद्रगढ़ और जींद।उत्तर प्रदेश के मेरठ,मुजफ्फरनगर,हापुड़,बुलंदशहर,बागपत और शामली।राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिले शामिल हैं। इन 18 जिलों में CNG N1 वाहनों की अनुमति जारी रहेगी।

 
N2 वाहनों के लिए भी तय हुई समयसीमा

सीएक्यूएम ने बताया कि N2 श्रेणी की गाड़ियों के लिए दिल्ली में 1 जनवरी 2028 से नई डीजल,पेट्रोल और सीएनजी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी जाएगी। यही रोक 1 जुलाई 2028 से ज्यादा वाहनों वाले पांच जिलों में भी लागू होगी। एनसीआर के बाकी 18 जिलों में 1 जनवरी 2029 से नई डीजल और पेट्रोल N2 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक होगी, जबकि CNG N2 गाड़ियों को मंजूरी मिलती रहेगी।दिल्ली और ज्यादा वाहनों वाले पांच जिलों के बाहर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी शुरुआती दौर में है। इसीलिए इन 18 जिलों में CNG N1 और N2 गाड़ियों को मंजूरी मिलती रहेगी, जबकि डीजल और पेट्रोल LGV के रजिस्ट्रेशन पर रोक रहेगी।

ज्यादा प्रदूषण की वजह से लिया गया फैसला

सीएक्यूएम ने कहा कि ये रोक जरूरी थीं क्योंकि LGV गाड़ियों की कुल संख्या में हिस्सेदारी कम होने के बावजूद, उनसे होने वाला उत्सर्जन काफी ज्यादा होता है। LGV का इस्तेमाल ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, कूरियर सर्विस, तेजी से बिकने वाले कंज्यूमर गुड्स के डिस्ट्रीब्यूशन और शहर के अंदर सामान ढोने जैसे कामों के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस वजह से हर गाड़ी काफी ज्यादा किलोमीटर चलती है।सीएक्यूएम ने कहा,दिल्ली के NCT में चल रहे वाहनों के बेड़े से होने वाले PM उत्सर्जन में LGV का हिस्सा अनुमानित 5.1 प्रतिशत है, HVD जिलों में 2.3 प्रतिशत और बाकी NCR में 3.1 प्रतिशत है। हालांकि NCR में कुल सक्रिय वाहनों में LGV की हिस्सेदारी केवल 1.2 प्रतिशत है, लेकिन PM उत्सर्जन में इनका योगदान लगभग 3.3 प्रतिशत है।
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान कुल PM2.5 प्रदूषण में वाहनों का योगदान लगभग 23 प्रतिशत और गर्मियों में 18 प्रतिशत होता है। इसने कहा कि पार्टिकुलेट प्रदूषण कई स्रोतों से आता है। इनमें सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर यानी वातावरण में रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनने वाले कण भी प्रमुख हैं।

सीएनजी को लेकर भी सीएक्यूएम ने जताई चिंता

सीएक्यूएम ने LGV के लिए एक स्वच्छ ईंधन के रूप में सीएनजी की लंबे समय तक भूमिका पर भी सवाल उठाए। हालांकि सीएनजी से डीजल की तुलना में काफी कम सीधे पार्टिकुलेट उत्सर्जन होता है,लेकिन सीएक्यूएम ने कहा कि इससे नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन जारी रहता है। NOx सेकेंडरी PM2.5 बनने का कारण बनता है।सीएक्यूएम ने कहा कि 2025 में NCR में नए LGV रजिस्ट्रेशन में सीएनजी की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत थी। दिल्ली में LGV की बिक्री में सीएनजी की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत थी। वहीं ज्यादा वाहनों वाले जिलों और बाकी NCR में डीजल की हिस्सेदारी काफी बनी रही।

सीएक्यूएम ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया  के विश्लेषण का दिया हवाला

सीएक्यूएम ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के विश्लेषण का हवाला दिया।इसके मुताबिक एक BS-VI CNG LGV, BS-VI CNG पैसेंजर कार की तुलना में 57 गुना अधिक PM2.5 उत्सर्जित करता है। BS-VI यानी भारत स्टेज VI भारत का मौजूदा वाहन उत्सर्जन मानक है। यह NOx, पार्टिकुलेट मैटर, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषकों की सीमा तय करता है। वहीं विश्लेषण के मुताबिक एक BS-VI डीजल LGV, BS-VI CNG पैसेंजर कार की तुलना में करीब 130 गुना अधिक PM2.5 उत्सर्जित करता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने की तैयारी

दिसंबर 2025 में सीएक्यूएम की गठित विशेषज्ञ समिति ने दिल्ली और ज्यादा वाहनों वाले जिलों में N1 और N2 LGV को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की सिफारिश की थी। एनसीआर के बाकी जिलों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम की तैयारी को देखते हुए समिति ने EV और सीएनजी के इस्तेमाल की सलाह दी थी।
सीएक्यूएम ने कहा कि इस बदलाव को PM E-DRIVE और PARIVARTAN जैसी केंद्रीय योजनाओं का समर्थन मिल रहा है। दिल्ली EV पॉलिसी के तहत चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के प्रावधान भी इसमें मदद कर रहे हैं।ये कदम साफ सुथरे LGV की ओर बढ़ने में मदद करेंगे।

बता दें कि ये निर्देश सीएक्यूएम ने नेशनल कैपिटल रीजन एंड एडज्वाइनिंग एरियाज में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के लिए कमीशन एक्ट, 2021 के तहत जारी किए हैं।सीएक्यूएम ने दिल्ली सरकार और एनसीआर राज्यों की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे नए रजिस्ट्रेशन प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करें और इनके बारे में बड़े पैमाने पर जानकारी दें।


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