नई दिल्ली।समुद्र का एक अहम रास्ता बंद होने से भारतीय कारोबारियों की मुश्किलें किस कदर बढ़ सकती हैं,इसका सीधा उदाहरण रेड सी (लाल सागर) संकट है।इस संकट को शुरू हुए 1,000 से अधिक दिन हो चुका है।नवंबर 2023 में यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद से शुरू हुआ यह विवाद अब भारतीय एक्सपोर्टर्स,खासकर छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। सुरक्षा चिंताओं के कारण मालवाहक जहाजों को स्वेज नहर के बजाय पूरा अफ्रीका घूमकर (केप ऑफ गुड होप के रास्ते) जाना पड़ रहा है,इससे न सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है,बल्कि माल भेजने का खर्च भी आसमान छू रहा है।
यूरोप जाने वाले 80% कारोबार पर सीधा असर
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत का यूरोप के साथ होने वाला लगभग 80 फीसदी व्यापार इसी लाल सागर से होता है,रास्ता बदलने से यूरोप,ब्रिटेन,उत्तरी अफ्रीका और अमेरिका के पूर्वी तट पर सामान भेजने वाले व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है,इसका सबसे बुरा असर कपड़ा,इंजीनियरिंग सामान, केमिकल,चमड़ा,कालीन,खाद्य पदार्थ और मरीन (समुद्री) प्रोडक्ट्स बेचने वाले छोटे व्यापारियों पर पड़ा है,इसके साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने होर्मुज के पास भी जोखिम बढ़ा दिया है,जिससे कारोबारी सहमे हुए हैं।
लागत और समय में भारी बढ़ोतरी
इंडिया एसएमई फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार के मुताबिक इस संकट ने छोटे व्यापारियों पर एक अघोषित टैक्स लगा दिया है। विनोद कुमार के मुताबिक वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है।विदेशों में सामान पहुंचाने की कुल लागत (लैंडेड कॉस्ट) 4 से 12 फीसदी तक बढ़ गई है,यूरोप सामान पहुंचने के समय में 10 से 15 दिन की देरी हो रही है,पेमेंट देर से मिलने के कारण रोजमर्रा का कारोबार चलाने के लिए जरूरी पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की जरूरत 15 से 25 फीसदी तक बढ़ गई है।मुनाफे का मार्जिन कम होने और लागत बढ़ने से कम बजट वाले छोटे उद्योगों के लिए विदेशी बाजारों में टिके रहना मुश्किल हो रहा है।
सरकारी मदद और एक्सपोर्टर्स की नई मांगें
संकट के इस दौर में भारत सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS 5.0) के जरिए कारोबारियों को बड़ी राहत दी है।इस योजना के तहत भारत सरकार ने 1.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गारंटी जारी की है,जिसका फायदा उठाने वालों में 98 फीसदी छोटे उद्योग शामिल हैं।इस नकदी सहायता से कंपनियों को अपना प्रोडक्शन चालू रखने और नौकरियां बचाने में मदद मिली है।हालांकि इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) के चेयरमैन पंकज चड्ढा का कहना है कि सिर्फ कर्ज मिलने से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा।जब तक यह भू-राजनीतिक तनाव खत्म नहीं होता, तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी और कारोबारियों को खुद ही इस नुकसान को झेलना होगा।छोटे व्यापारियों ने अब सरकार से एक्सपोर्ट-क्रेडिट इंश्योरेंस बढ़ाने,टैक्स रिफंड की प्रक्रिया तेज करने और माल भाड़े में सीधे आर्थिक मदद देने की गुहार लगाई है ताकि वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।