नई दिल्ली।एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink ने भारत में अपनी दूसरी पीढ़ी यानी Gen 2 सैटेलाइट नेटवर्क के लिए फिर से आवेदन किया है। कंपनी ने भारत में लगभग 30 हजार सैटेलाइट तैनात करने की मंजूरी मांगी है।इस बार आवेदन में Direct-to-Device कनेक्टिविटी जैसी नई सुविधा भी शामिल है।यह जानकारी द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है।
Gen 2 के लिए फिर मांगी मंजूरी
Starlink ने भारत में अपने पहले और दूसरे चरण के सैटेलाइट नेटवर्क के लिए पहले भी आवेदन किया था। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र यानी IN-SPACe ने फिलहाल कंपनी के Gen 1 नेटवर्क को मंजूरी दी थी। Gen 1 नेटवर्क में 4,408 लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट शामिल हैं। इसके जरिए Starlink भारत में सामान्य सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा शुरू कर सकती है।वहीं कंपनी के पुराने Gen 2 आवेदन को मंजूरी नहीं मिल पाई थी। इसकी वजह यह थी कि आवेदन में शामिल कुछ सुविधाएं और फ्रीक्वेंसी बैंड भारत के मौजूदा नियमों के अनुरूप नहीं थे। अब Starlink ने नए आवेदन के जरिए एक बार फिर Gen 2 नेटवर्क के लिए रास्ता बनाने की कोशिश की है।
क्या है Direct-to-Device सुविधा
Starlink के नए आवेदन की सबसे खास बात Direct-to-Device यानी D2D कनेक्टिविटी है। इस तकनीक के जरिए खास तौर पर तैयार मोबाइल फोन और दूसरे डिवाइस सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकते हैं।इसका मतलब है कि यूजर को इंटरनेट या कनेक्टिविटी के लिए हर बार अलग Starlink डिश या सैटेलाइट टर्मिनल की जरूरत नहीं होगी। ऐसे इलाकों में यह सुविधा काफी उपयोगी हो सकती है जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है या बिल्कुल उपलब्ध नहीं है।
मसलन,दूरदराज के गांवों,पहाड़ी इलाकों और ऐसे क्षेत्रों में जहां मोबाइल टावर लगाना मुश्किल है,वहां सैटेलाइट के जरिए सीधे मोबाइल तक कनेक्टिविटी पहुंचाई जा सकती है।
भारत में D2D के नियम अभी तय नहीं
भारत में D2D सेवाओं के लिए अभी अंतिम नियम तय नहीं हुए हैं। Telecom Regulatory Authority of India इस मुद्दे पर विचार कर रही है। सरकार को इस सेवा के लिए स्पेक्ट्रम बैंड और दूसरे जरूरी नियम भी तय करने हैं।दूसरी ओर, भारतीय टेलीकॉम कंपनियों ने सैटेलाइट कंपनियों की D2D सेवाओं को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर सैटेलाइट कंपनियां सीधे मोबाइल यूजर्स को कनेक्टिविटी देती हैं, तो उन पर पारंपरिक टेलीकॉम कंपनियों जैसे नियम लागू होने चाहिए। कंपनियों को यह भी डर है कि इससे टेलीकॉम बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।
Gen 2 में 42 हजार तक सैटेलाइट का प्लान
SpaceX की योजना लंबे समय में Gen 2 नेटवर्क के तहत करीब 42,000 सैटेलाइट तैनात करने की है। भारत में फिलहाल कंपनी ने करीब 30 हजार सैटेलाइट के लिए मंजूरी मांगी है।जरूरत पड़ने पर बाद में अतिरिक्त सैटेलाइट के लिए भी आवेदन किया जा सकता है। Gen 2 नेटवर्क Starlink के मौजूदा नेटवर्क के मुकाबले ज्यादा सुविधाओं के साथ तैयार किया जा रहा है। D2D कनेक्टिविटी इसकी प्रमुख सुविधाओं में से एक है।
भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में कई बड़ी कंपनियां अपनी जगह बनाने की तैयारी कर रही हैं। Reliance Jio ने करीब 1,600 LEO सैटेलाइट का नेटवर्क प्रस्तावित किया है। वहीं Bharti समर्थित Eutelsat OneWeb भी भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। Amazon का सैटेलाइट कारोबार भी भारतीय बाजार में उतरने की तैयारी कर रहा है। Starlink को जुलाई 2025 में भारत में Gen 1 सैटेलाइट नेटवर्क के लिए IN-SPACe से मंजूरी मिल चुकी है।हालांकि व्यावसायिक सेवा शुरू करने से पहले कंपनी को स्पेक्ट्रम,सुरक्षा मंजूरी और अन्य जरूरी नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
Starlink के लिए क्यों अहम है Gen 2
अगर भारत में Starlink के Gen 2 नेटवर्क और D2D सेवा को मंजूरी मिल जाती है,तो कंपनी का कारोबार सिर्फ सैटेलाइट ब्रॉडबैंड तक सीमित नहीं रहेगा।वह सीधे मोबाइल फोन को कनेक्टिविटी देने के क्षेत्र में भी पारंपरिक टेलीकॉम कंपनियों को टक्कर दे सकती है।भारत में बड़ी संख्या में ऐसे इलाके हैं जहां मोबाइल नेटवर्क की पहुंच अभी भी चुनौती है। ऐसे में D2D तकनीक Starlink के लिए भारत के बाजार में एक बड़ा अवसर बन सकती है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक भारत में बनने वाले नए नियमों और स्पेक्ट्रम आवंटन पर निर्भर करेगी।