टैर‍िफ-टैर‍िफ करते रहे ट्रंप,भारत यूएस के मार्केट में बेच आया पूरा माल


टैर‍िफ-टैर‍िफ करते रहे ट्रंप,भारत यूएस के मार्केट में बेच आया पूरा माल

मनोज बिसारिया | 19 Aug 2026

 

नई दिल्ली।अमेर‍िका के राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप टैर‍िफ-टैर‍िफ‍ च‍िल्‍लाते रह गए और भारत उनके ही मार्केट में पूरा माल बेच आया।पहले लगा था क‍ि अमेर‍िकी टैर‍िफ से भारत के एक्‍सपोर्ट में ग‍िरावट आएगी,लेकिन अब अमेर‍िकी एजेंस‍ी ने ही सबूत देकर बताया है क‍ि भारत को कोई फर्क नहीं पड़ा।भारत ने एक साल में उतना ही माल अमेर‍िकी बाजार में बेचा,ज‍ितना इससे पहले के साल में बेचता आया है।

     ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक...

अमेर‍िकी एजेंसी ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप की टैर‍िफ नीत‍ियों के बाद भारत ने पिछले एक साल में अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने की पूरी कोशिश की।सरकार ने ब्रिटेन,यूरोपीय यून‍ियन,ओमान और न्यूजीलैंड जैसे तमाम देशों के साथ ट्रेड डील की।मकसद साफ था क‍ि अगर किसी एक बड़े बाजार में दिक्कत आए तो भारतीय एक्‍सपोर्टर के पास दूसरे बाजार भी मौजूद रहें,लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है।

    इसे आंकड़ों से समझिए

पिछले 12 महीनों में भारत के कुल एक्‍सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी रही है।भारत विदेशों में जितना सामान बेचता है,उसमें लगभग हर 5 डॉलर में से 1 डॉलर का सामान अमेरिका जाता है।खास बात यह है कि ट्रंप के भारी टैरिफ और व्यापारिक तनाव के बावजूद यह हिस्सेदारी लगभग बनी रही।ज‍ितना सामान भारत वहां भेजता था, तकरीबन उतना ही माल अभी भी भेजा।पिछले साल अमेरिका ने भारतीय सामान पर कई बार भारी टैरिफ लगाए। एक समय टैरिफ बढ़कर 50 फीसदी तक पहुंच गया था।बाद में इसे घटाकर फरवरी में 18 फीसदी किया गया और अब भारतीय सामान पर लगभग 10 फीसदी टैरिफ लागू है,इसके बावजूद अमेरिका भारतीय निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है।

कैसे मार्केट बचा ले गया भारत

इसका सबसे बड़ा कारण अमेरिका का विशाल बाजार है। भारत अमेरिकी बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान,दवाइयां,कपड़े,रत्न और आभूषण जैसी कई चीजें बेचता है।अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए मांग भी बड़ी है और कीमत मिलने की संभावना भी बेहतर है,इसलिए अचानक इस बाजार की जगह कोई दूसरा देश लेना आसान नहीं है।भारत ने इसी जोखिम को कम करने के लिए पिछले एक साल में तेजी से नए बाजार तलाशे।ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौता जुलाई में लागू हुआ,यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ भी समझौते हुए।भारत अब लैटिन अमेरिका,अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देशों के साथ भी व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

एक्‍सपर्ट कमेंट

लेकिन नए बाजार बनाना कोई ऐसा काम नहीं है,जिसका नतीजा अगले महीने दिख जाए।फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के अजय सहाय के मुताबिक बाजार में विविधता लाने में कम से कम दो से तीन साल लग सकते हैं। यानी आज समझौता हुआ तो जरूरी नहीं कि कल से निर्यात तेजी से बढ़ने लगे।

भारत के दूसरे बड़े बाजारों की तस्वीर भी है दिलचस्प

भारत के दूसरे बड़े बाजारों की तस्वीर भी दिलचस्प है।आंकड़ों के मुताबिक यूएई करीब 8 फीसदी हिस्सेदारी के साथ भारत का बड़ा एक्‍सपोर्ट मार्केट है।यूरोपीय यून‍ियन की हिस्सेदारी लगभग 16 फीसदी,गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC की लगभग 13 फीसदी और आसियान की लगभग 9 फीसदी है।वहीं बाकी देशों का हिस्सा मिलाकर लगभग 34 फीसदी है।

यूएई का खुल रहा दरवाजा

यूएई भारत के लिए खास तौर पर तेजी से बढ़ता बाजार बन रहा है।भारत और यूएई के बीच व्यापार समझौता 2022 में हुआ था।अब पिछले 12 महीनों में यूएई को भारत का निर्यात लगभग 37.37 अरब डॉलर रहा।यानी अमेरिका के बाद यूएई भारत के सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजारों में शामिल है।

चीन के मार्केट में छाने लगे भारतीय प्रोडक्‍ट

चीन की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है।पिछले 12 महीनों में भारत का चीन को निर्यात लगभग 42 फीसदी बढ़ा और लगभग 21.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया।फिर भी यह अमेरिका को होने वाले लगभग 88.5 अरब डॉलर के निर्यात से काफी कम है।यानी चीन में तेजी दिख रही है,लेकिन अभी अमेरिका की बराबरी से बहुत दूर है।

छोटे बाजारों में भी जलवा

कुछ छोटे बाजारों में भी भारत को अच्छी बढ़त मिल रही है। तंजानिया,वियतनाम,दक्षिण कोरिया,श्रीलंका और केन्या जैसे देशों में भारतीय निर्यात तेजी से बढ़ा है।ऑस्ट्रेलिया भी भारत के तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल हो रहा है।इसका मतलब यह है कि भारत की बाजारों को फैलाने की रणनीति काम करना शुरू कर रही है,लेकिन अभी उसका असर सीमित है।

भारत का नेक्‍स्‍ट टारगेट

भारत का अगला लक्ष्य सिर्फ नए देश खोजना नहीं,बल्कि नए उत्पाद भी विदेशों में बेचना है।भारत ने लगभग 500 नई उत्पाद श्रेणियों पर फोकस बढ़ाया है,इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और समुद्री उत्पाद प्रमुख हैं।भारत चाहता है कि कुछ चुनिंदा सामानों और कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया के ज्यादा बाजारों में अपनी जगह बनाए।
भारतीय प्रोडक्‍ट्स की अमेर‍िक‍ियों के बीच मांग अभी भी काफी ज्‍यादा है और यह खत्‍म होने वाली नहीं है।हालांक‍ि अब भारत ने यह सीख जरूर ले ली है कि एक ही बड़े बाजार पर ज्यादा निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।ब्रिटेन,यूरोप, यूएई,ऑस्ट्रेलिया,अफ्रीका,लैटिन अमेरिका और एशिया में नए बाजार बनाना इसी रणनीति का हिस्सा है।आने वाले दो-तीन साल यह तय करेंगे कि भारत अमेरिका पर अपनी निर्भरता सच में घटा पाता है या नहीं।


add

अपडेट न्यूज


भारत से सुपरहिट
Beautiful cake stands from Ellementry

Ellementry

© Copyright 2019 | Vanik Times. All rights reserved