नई दिल्ली।केंद्र की मोदी सरकार द्वारा केवल निर्यात के उद्देश्य से मेक इन इंडिया उत्पादों के लिए इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने के फैसले का उद्योग जगत और विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार देश के 1.8 करोड़ मैन्युफैक्चरिंग सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यमों को दुनियाभर के बाजारों तक पहुंच दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
MSME को मिलेगा ग्लोबल मार्केट का रास्ता
उद्योग संगठन एम्पावर इंडिया ने कहा कि नई नीति उन प्रमुख बाधाओं को दूर करेगी,जिनकी वजह से अब तक छोटे निर्माता अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी नहीं बढ़ा पा रहे थे। नई व्यवस्था के तहत स्पेशलाइज्ड ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और मध्यस्थ सीमा-पार लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, भुगतान और वैश्विक बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा सकेंगे। इससे छोटे उद्यमों को अलग से निर्यात ढांचा विकसित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इन राज्यों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश,तमिलनाडु,गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख विनिर्माण राज्यों के MSME को इस नीति से सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है। इन राज्यों में वस्त्र,इंजीनियरिंग उत्पाद,आभूषण,हस्तशिल्प,मसाले और सुगंधित उत्पाद जैसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।
एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की दूर होगी कमी
एम्पावर इंडिया के महानिदेशक के गिरी ने कहा कि यह नीति स्पष्ट संदेश देती है कि भारत बड़े पैमाने पर विनिर्माण और निर्यात के लिए तैयार है।गिरी ने कहा कि अब एफडीआई समर्थित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय निर्माता सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंच सकेंगे। गिरी ने कहा कि भारतीय MSME की चुनौती उत्पादन क्षमता नहीं बल्कि निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी रही है और यह सुधार उसी कमी को दूर करता है।
हाई पीक स्ट्रेटेजी एलएलसी के फाउंडर डॉ. स्पेंसर कोहेन ने कहा...
हाई पीक स्ट्रेटेजी एलएलसी के फाउंडर डॉ. स्पेंसर कोहेन ने कहा कि चीन के अनुभव से साबित हुआ है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म छोटे निर्माताओं और वैश्विक ग्राहकों के बीच प्रभावी सेतु का काम करते हैं। भारत भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसके पास वैश्विक ई-कॉमर्स निर्यात में मजबूत स्थिति बनाने का अवसर है।
इंडिया SME फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा...
इंडिया SME फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि संगठन के 13 लाख से ज्यादा सदस्यों के बीच इस सुधार को लेकर उत्साह है।अधिकांश MSME के लिए सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक बाजार तक पहुंच थी,जिसे यह नीति काफी हद तक आसान बनाएगी। इससे अधिक उद्यम निर्यात से जुड़ सकेंगे और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।
सफल क्रियान्वयन पर रहेगा फोकस
आईआईएम अहमदाबाद के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर विश्वनाथ पिंगली ने कहा कि यह रणनीतिक नीति बदलाव भारत के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि उन्होंने इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट नियामकीय दिशा-निर्देशों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कानूनी फर्म इंडसलॉ की पार्टनर श्रेया सूरी ने कहा...
कानूनी फर्म इंडसलॉ की पार्टनर श्रेया सूरी ने कहा कि सरकार ने इस सुधार के जरिए निर्यात को बढ़ावा देने और घरेलू ई-कॉमर्स से जुड़े मौजूदा एफडीआई नियमों के बीच संतुलन बनाए रखा है।स्पष्ट अनुपालन और कार्यान्वयन दिशानिर्देश निवेशकों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और निर्माताओं के लिए भरोसेमंद माहौल तैयार करेंगे।
एम्पावर इंडिया का कहना है...
एम्पावर इंडिया का कहना है कि जैसे-जैसे भारत नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) की दिशा में आगे बढ़ रहा है, डिजिटल माध्यमों से संचालित निर्यात व्यवस्था देश के लाखों निर्माताओं को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी। संगठन ने सरकार से स्पष्ट और पारदर्शी कार्यान्वयन ढांचा तैयार करने की भी अपील की।