नई दिल्ली।विश्व में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा भारत के लोग जान गंवाते हैं।सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है।सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस बारे में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुताबिक अक्टूबर 2028 से सभी नए दोपहिया और तिपहिया गाड़ियों,कारों, बसों और ट्रकों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम होना जरूरी होगा। सड़कों पर गाड़ियों की टक्कर और हादसों को रोकने के लिए V2V टेक्नोलॉजी लाई जा रही है,जिन गाड़ियों पर पहले से यह डेवाइस लगा है,उन्हें 1 अक्टूबर 2027 से संबंधित मानकों का पालन करना होगा।
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक...
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक V2V कम्युनिकेशन सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव है। शुरुआत में, अक्टूबर 2027 से बनने वाले L (दोपहिया और तिपहिया), M (पैसेंजर व्हीकल) और N (गुड्स व्हीकल) कैटेगरी के सभी वाहनों को नए नोटिफाइड ऑटोमोटिव स्टैंडर्ड, AIS-230 का पालन करना होगा।यानी उनमें V2V कम्युनिकेशन सिस्टम लगा होना चाहिए। उम्मीद है कि इससे ऑटो कंपनियों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स को नई जरूरतों को लागू करने की तैयारी के लिए काफी समय मिलेगा।
कैसे अलग है यह तकनीक
इस सिस्टम से किसी सेलुलर नेटवर्क के बिना गाड़ियों के बीच स्पीड,दिशा,स्थिति और ब्रेकिंग डेटा का रियल-टाइम आदान-प्रदान करने में मदद मिलती है।इससे ब्लाइंड कर्व, चौराहे या गलत दिशा से आने वाले ड्राइवरों के कारण होने वाली टक्कर को रोका जा सकेगा। हर गाड़ी में एक ऐसा डेवाइस लगाना होगा जो पास आ रही गाड़ियों का अपने आप पता लगा लेगा। इससे हादसों को टालने में मदद मिलेगी।
पारंपरिक वाहन-सुरक्षा प्रणालियां मुख्य रूप से ऑनबोर्ड सेंसर और ड्राइवर की प्रतिक्रिया पर करती है निर्भर
पारंपरिक वाहन-सुरक्षा प्रणालियां मुख्य रूप से ऑनबोर्ड सेंसर और ड्राइवर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती हैं। इसके उलट V2V कम्युनिकेशन लाइन ऑफ साइट से परे की जानकारी भी दे सकती है।मंत्रालय ने दावा किया कि इससे एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम को मदद मिलेगी। V2V कम्युनिकेशन सिस्टम से लैस हर गाड़ी लगातार अपनी लोकेशन,स्पीड और दिशा को छोटे रेडियो सिग्नल के रूप में भेजेगी।
ऐसे टलेगा हादसा
इस सिस्टम आगे चल रही गाड़ी के अचानक ब्रेक लगाने, टक्कर के जोखिम,असुरक्षित तरीके से लेन बदलने,गलत दिशा में गाड़ी चलाने और इमरजेंसी वाहनों के पास आने की जानकारी भी देगा।सिग्नल पाने वाली गाड़ी का सिस्टम इस जानकारी की तुलना अपनी लोकेशन,स्पीड और दिशा से करेगा ताकि संभावित टक्कर का अनुमान लगाया जा सके और ड्राइवर को अलर्ट किया जा सके।
बाद के चरण में व्हीकल-टू-इन्फ्रास्ट्रक्चर (V2I) कम्युनिकेशन सिस्टम भी लाएगी सरकार
बाद के चरण में सरकार व्हीकल-टू-इन्फ्रास्ट्रक्चर (V2I) कम्युनिकेशन सिस्टम भी लाएगी।इसमें गाड़ियों को अलर्ट करने के लिए सिग्नल और बिजली के खंभों,पुलों और फ्लाईओवर के किनारों और बैरिकेड वाले इलाकों जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ सेंसर लगाए जाएंगे। टेलीकम्युनिकेशन विभाग ने V2V और दूसरे इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम एप्लिकेशन के लिए 5.875 GHz से 5.925 GHz का फ्रीक्वेंसी बैंड आवंटित किया है।