नई दिल्ली।वैश्विक व्यापार और तकनीक की दुनिया में दुर्लभ मृदा तत्व यानी रेयर अर्थ एलिमेंट्स लंबे समय से चीन की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं।लैपटॉप,स्मार्टफोन के मैग्नेट, इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों से लेकर गाइडेड मिसाइलों और पवन टर्बाइनों तक में इन तत्वों का इस्तेमाल होता है।हाल के वर्षों में चीन ने अमेरिकी और जापानी कंपनियों पर नकेल कसने के लिए इनके निर्यात पर प्रतिबंध लगाए।चीन का यह हथियार अब धीरे-धीरे अपना प्रभाव खो रहा है।
भारत समेत विश्व खोज रहा विकल्प
लगभग 15 साल पहले विश्व में रेयर अर्थ तत्वों की लगभग पूरी माइनिंग और रिफाइनिंग चीन में होती थी,लेकिन लंबे समय से चीन की ओर से सप्लाई रोकने की धमकियों के कारण भारत समेत दूसरे देशों ने रेयर अर्थ के नए भंडार खोजने शुरू किए।साथ ही खनन और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ाया।अब विश्व के लगभग एक-तिहाई रेयर अर्थ उत्पादन चीन के बाहर होता है।
विश्व में मौजूद तत्व
नियोडिमियम और प्रासियोडिमियम जैसे तत्व आम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मैग्नेट में काम आते हैं।अब विश्व में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।इन तत्वों को हेवी रेयर अर्थ कहा जाता है।सामान्य रेयर अर्थ मैग्नेट ज्यादा तापमान पर अपनी क्षमता खो सकते हैं।इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन मोटर, विंड टर्बाइन, गाइडेड मिसाइल और एयरोस्पेस जैसे हाई-परफॉर्मेंस क्षेत्रों में डिस्प्रोसियम, टर्बियम और समैरियम की जरूरत पड़ती है।
चीन के बाहर भी मिल रहे भंडार
कुछ साल पहले तक माना जाता था कि इन भारी रेयर अर्थ तत्वों पर चीन का लगभग पूरा नियंत्रण है। इसका कारण यह था कि इनके समृद्ध भंडार बेहद दुर्लभ माने जाते थे।दक्षिणी चीन के लोंगनान क्षेत्र में 1969 में ऐसा ही एक महत्वपूर्ण भंडार मिला था,लेकिन अब वैज्ञानिकों और भूविज्ञानियों ने विश्व भर में ऐसे नए भंडार ढूंढ निकाले हैं।चीन की सीमा से लगे म्यांमार के कचिन राज्य में बड़े पैमाने पर खनन हो रहा है।
ब्राजील और अमेरिका में 2.8 अरब डॉलर के सौदे के तहत भारी रेयर अर्थ्स का खनन और प्रोसेसिंग शुरू की जा रही है।
अन्य देश मेडागास्कर,मलावी,युगांडा,चिली,ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया,वियतनाम और फिनलैंड में भी नए भंडार प्रमाणित हुए हैं।लिनास रेयर अर्थ्स और एनपी स्ट्रैटेजिक जैसी वैश्विक कंपनियां चीन से इतर अपनी प्रोसेसिंग इकाइयां बना रही हैं।
भारत का कितना प्रयास
भारत के लिए यह वैश्विक बदलाव एक बहुत बड़ा रणनीतिक अवसर और चेतावनी दोनों है।भारत के पास तटीय रेत के रूप में रेयर अर्थ तत्वों का विश्व का 5वां सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन प्रोसेसिंग तकनीक और HRE की कमी के कारण भारत अब तक चीन पर निर्भर रहा है।हालांकि भारत भी अब रेयर अर्थ की प्रोसेसिंग को बढ़ा रहा है।भारत सरकार ने 16,300 करोड़ रुपये से अधिक के आवंटन के साथ नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन लॉन्च किया है। इसका लक्ष्य भारत में 1200 खदान स्थलों की खोज, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना है।सरकारी उपक्रम IREL (India) Limited ओडिशा, केरल और तमिलनाडु में मोनाज़ाइट अयस्क से रेयर अर्थ्स निकालता है। विशाखापट्टनम में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट प्लांट के जरिए घरेलू मैग्नेट निर्माण को गति दी जा रही है।चीन पर निर्भरता घटाने के लिए भारत खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया,अर्जेंटीना और अफ्रीका में खनिज संपत्तियों में सीधी हिस्सेदारी खरीद रहा है।