कमजोर नहीं,देर से संभला मानसून,अगस्त-सितंबर की बारिश पूरे साल की बदल सकती है तस्वीर


कमजोर नहीं,देर से संभला मानसून,अगस्त-सितंबर की बारिश पूरे साल की बदल सकती है तस्वीर

मनोज बिसारिया | 04 Aug 2026

 

नई दिल्ली।बीते कुछ हफ्तों में द​क्षिण-प​​श्चिम मानसून में तेजी दिखी है।अच्छी बारिश से खरीफ बुवाई को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।एसेट मैनेजमेंट कंपनी बजाज एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि मानसून ने रफ्तार पकड़ी है,लेकिन बारिश के क्षेत्रवार असमान वितरण के चलते अब भी उसका लॉन्ग टर्म एवरेज 16 फीसदी कम है।मानसून के बाकी महीनों का प्रदर्शन ही कृषि उत्पादन और महंगाई पर इसके असर को तय करेगा।अगर अगस्त और सितंबर में भी बारिश की रफ्तार बनी रहती है,तो कमजोर मानसून को लेकर चिंता काफी हद तक खत्म हो सकती है और 2026 को कमजोर नहीं, बल्कि देर से शुरू होकर सुधरने वाला मानसून वर्ष माना जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक सप्लाई से जुड़ी अस्थायी दिक्कतों के चलते निकट भविष्य में खाने-पीने की वस्तुओं की पर दबाव बना रह सकता है।हालांकि बारिश में सुधार,पर्याप्त खाद्यान्न भंडार,मजबूत ग्रामीण मांग और अनुकूल ब्याज दरों का माहौल इस जोखिम को बड़े आर्थिक संकट में बदलने से रोक सकता है।

पहले से बेहतर हुए हालात

रिपोर्ट बताती है कि इस साल की तस्वीर फिलहाल पहले से ज्यादा सकारात्मक नजर आ रही है।जून के आखिरी सप्ताह और पूरे जुलाई में बारिश में तेज सुधार हुआ।जलाशयों में पानी का स्तर संतोषजनक है और ज्यादातर नदी बेसिनों में जलस्तर दीर्घकालिक औसत के आसपास या उससे ऊपर है। इसके अलावा देश में खाद्यान्न का भंडार बफर स्तर से पांच गुना ज्यादा है।जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल अनाज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संकेतक भी मजबूत बने हुए हैं। मई में ट्रैक्टरों की बिक्री सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़ी, कृषि लोन में वृद्धि करीब 15 फीसदी रही और गैर-कृषि आय भी मजबूत बनी हुई है। इससे बोआई में देरी के बावजूद ग्रामीण परिवारों का खर्च बना हुआ है।

आरबीआई संभालेगा महंगाई

बजाज एएमसी का अनुमान है कि खाने-पीने की वस्तुओं की सप्लाई पर अस्थायी दबाव के चलते महंगाई अपने हाल के निचले स्तर से बढ़ सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई औसतन 5 से 5.5 फीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि कोर इंफ्लेशन अभी काबू में है। इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक के पास अगले कुछ महीनों तक रीपो दर में बदलाव नहीं करने की पर्याप्त गुंजाइश है।

रिपोर्ट के मुताबिक 

रिपोर्ट के मुताबिक ब्याज दरें स्थिर रहने से बॉन्ड यील्ड पर दबाव सीमित रहेगा।वहीं ग्रामीण मांग में सुधार से कृषि इनपुट, कृषि उपकरण,ग्रामीण बाजार पर निर्भर ऑटो कंपनियों और उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों को फायदा मिल सकता है।साथ ही ग्रामीण खपत में सुधार से मार्केट का भरोसा भी मजबूत हो सकता है।हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते मार्केट सेंटीमेंट दबाव में रहा है।

जून 100 साल का सबसे सूखा महीना

ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो मानसून की शुरुआती स्थिति से पूरे सीजन का नतीजा तय नहीं होता। जून 2026 पिछले 100 वर्षों के सबसे सूखे जून महीनों में शामिल रहा, लेकिन अर्थव्यवस्था पर वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जुलाई,अगस्त और सितंबर में बारिश कैसी रहती है। 1926 में मानसून की शुरुआत बेहद कमजोर रही थी,लेकिन जुलाई से सितंबर के बीच बारिश में जोरदार सुधार हुआ और पूरे सीजन में बारिश सामान्य से 11 फीसदी ज्यादा रही। एक बार मानसून के कमजोर रहने की तुलना में लगातार दो साल कमजोर मानसून का असर कृषि आय,ग्रामीण खपत और आर्थिक वृद्धि पर कहीं अधिक गंभीर होता है।

अर्थव्यवस्था पर कैसे होता है असर

कमजोर मानसून का सबसे पहला असर कृषि उत्पादन पर पड़ता है।इससे किसानों की आय घटती है और ग्रामीण इलाकों में खपत धीमी पड़ जाती है।इसका असर ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन,उर्वरक और रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान जैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों पर भी दिखाई देता है।
ग्रामीण मांग में कमी का असर आगे चलकर आर्थिक वृद्धि, खाद्य महंगाई (खाने-पीने के वस्तुओं की महंगाई) और कंपनियों की कमाई पर भी पड़ता है। साल 2009 में कमजोर मानसून के कारण कृषि उत्पादन और ग्रामीण खपत दोनों प्रभावित हुए थे। वहीं 2014 और 2015 में लगातार दो साल कमजोर मानसून ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक दबाव बनाए रखा।


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