नई दिल्ली।कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतों में फिर से तेजी नजर आई है।अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा दुश्मनी इसका सबसे बड़ा कारण है।सऊदी अरब पर हूती हमले,होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कार्गो पर अमेरिका के प्रस्तावित चार्ज,इसने भारत के लिए नए सिरे से टेंशन बढ़ा दी है।इससे भारत की तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ सकता है।भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छा नहीं है।इससे गैस के दाम बढ़ने का खतरा है।मंगलवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत पिछले हफ्ते के 72 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर से बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
एलपीजी की सप्लाई पर बन सकता है दबाव
इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि भारत ऑल्टरनेटिव सोर्सेज से कच्चा तेल और एलएनजी मंगा सकता है। फिर भले ही इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़े।हालांकि एलपीजी की सप्लाई फिर से दबाव में आ सकती है। यह काफी हद तक खाड़ी देशों से होने वाले आयात पर निर्भर है।
जानें इंडस्ट्री के अधिकारी ने क्या दी चेतावनी
इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने चेतावनी दी कि इस नए टकराव ने और ज्यादा अनिश्चितता पैदा कर दी है।खासकर ऐसे समय में जब महीनों तक स्टॉक का इस्तेमाल होने के बाद दुनिया भर में तेल का भंडार पहले ही कम हो चुका है।अधिकारी ने कहा, यह बात साफ होती जा रही है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना कंट्रोल नहीं छोड़ेगा। वह इस टकराव को जारी रखने और इसे और बढ़ाने के लिए तैयार है।अधिकारी ने टैंकरों पर ईरान के नए हमलों और इस टकराव में हूतियों की भूमिका का जिक्र किया।कहा कि अमेरिका या खाड़ी देश इस स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण स्वीकार नहीं कर सकते। इसलिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यह सब कैसे खत्म होगा।
ईरान पर दोबारा नौसैनिक नाकाबंदी
अमेरिका ने सोमवार को घोषणा की कि वह ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी फिर से शुरू करेगा। होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए अपनी सेना का इस्तेमाल करेगा। कारण है कि ईरान ने होर्मुज को बंद करने की घोषणा की थी।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज से गुजरने वाले सभी कार्गो पर 20 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव भी दिया है।इसने इंडस्ट्री के अधिकारियों को उलझन में डाल दिया है।अधिकारियों का अनुमान है कि मौजूदा कीमतों पर इस स्ट्रेट से भेजे जाने वाले कच्चे तेल की लागत में लगभग 15 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होगी।
एक अधिकारी ने पूछा,लागत में इतने अंतर के साथ कोई इस क्षेत्र से कच्चा तेल क्यों मंगाएगा,उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस प्रस्ताव को लागू करने में मुश्किल हो सकती है। कारण है कि यह आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं है। इसका व्यापक विरोध भी हो सकता है।
सीमित रहेगी खाड़ी देशों से सप्लाई
अधिकारियों का कहना है कि खाड़ी देशों से कच्चे तेल की सप्लाई सीमित रहेगी।इससे मांग गैर-खाड़ी सप्लायरों की ओर मुड़ जाएगी।तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर दागी थीं मिसाइलें
बता दें कि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागी थीं,ये ईरान के सहयोगी हैं। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान में ज़ंग शुरू होने के दौरान ये साइडलाइन रहे थे।उन्होंने सऊदी अरब पर यमन के सना में उनके हवाई अड्डे पर बमबारी करने का आरोप लगाया था।इस टकराव में हूती विद्रोहियों के शामिल होने से रेड सी रूट में रुकावट का डर फिर से पैदा हो गया है।यह रूट एशिया में तेल की सप्लाई के लिए अहम शिपिंग कॉरिडोर है।होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के बाद सऊदी कच्चे तेल के एक्सपोर्ट का वैकल्पिक रास्ता भी है।
भारत ने की है हमलों की निंंदा
2023 में रेड सी में कमर्शियल जहाजों पर हूती हमलों के कारण कई शिपिंग कंपनियों को केप ऑफ गुड होप से होकर जाने का रास्ता चुनना पड़ा। इससे यात्रा का समय और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया।भारत ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो जहाजों पर हुए हमलों की निंदा की। इनमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। 10 अन्य घायल हो गए।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कमर्शियल जहाजों और आम लोगों के इस्तेमाल वाले इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को रोकने की अपील की। मांग की कि स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को बिना किसी रुकावट के फिर से शुरू किया जाए।