भारत-इजरायल के बीच बीआईए हुआ लागू,बदलने वाली है 1996 वाली फिल्म 


भारत-इजरायल के बीच बीआईए हुआ लागू,बदलने वाली है 1996 वाली फिल्म 

मनोज बिसारिया | 04 Jul 2026

 

नई दिल्‍ली।भारत और इजरायल के बीच बाइलेट्रल इंवेस्‍टमेंट एग्रीमेंट (बीआईए) आज शनिवार से लागू हो गया है।पिछले साल 8 सितंबर को दोनों देशों ने नई दिल्‍ली में इस पर हस्‍ताक्षर किए थे।यह भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश के लिए अधिक भरोसेमंद माहौल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

इस समझौते का मकसद निवेश और निवेशकों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करना...

इस समझौते का मकसद निवेश और निवेशकों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करना है।साथ ही वैध सार्वजनिक नीति के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नियम बनाने के प्रत्येक देश के संप्रभु अधिकार को बनाए रखना है।इससे सीमा-पार निवेश को बढ़ावा मिलने और भारत-इजरायल आर्थिक साझेदारी के और गहरे होने की भी उम्मीद है।

नया एग्रीमेंट पुरानी ट्रीटी की लेगा जगह

यह नया एग्रीमेंट भारत-इजरायल बाइलेट्रल इंवेस्‍टमेंट ट्रीटी (बीआईटी) 1996 की जगह लेता है। इंवेस्टमेंट फ्रेमवर्क को भारत के संशोधित मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि और समकालीन अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के अनुरूप बनाता है। यह समझौता मौजूदा निवेश और किसी भी देश के कानूनों के तहत स्वीकार किए गए नए निवेश,दोनों पर लागू होता है।

निवेशकों को मिलेगी ज्‍यादा सुरक्षा

इस समझौते की एक मुख्य विशेषता निवेशकों की सुरक्षा और सरकारों की नियामक शक्तियों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।यह एग्रीमेंट निवेशकों को न्याय से वंचित किए जाने, उचित प्रक्रिया के मौलिक उल्लंघन,लक्षित भेदभाव और स्पष्ट रूप से मनमाने व्यवहार से बचाता है।साथ ही यह साफ तौर पर पुष्टि करता है कि भारत और इजरायल दोनों को सार्वजनिक स्वास्थ्य,पर्यावरण संरक्षण और अन्य वैध सार्वजनिक नीति लक्ष्यों जैसे क्षेत्रों में निवेश को विनियमित करने का अधिकार है। रेगुलेटरी उपाय जो किसी निवेशक के मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं, वे अपने आप ही एग्रीमेंट का उल्लंघन नहीं माने जाते हैं।

निवेशकों के साथ समान व्यवहार

यह समझौता राष्ट्रीय व्यवहार (नेशनल ट्रीटमेंट) प्रदान करता है। इसके तहत भारत और इजरायल को समान परिस्थितियों में दूसरे देश के निवेशकों के साथ घरेलू निवेशकों की तुलना में कम अनुकूल व्यवहार नहीं करना है। हालांकि यह प्रावधान भूमि और रियल एस्टेट के अधिकारों पर लागू नहीं होता है।

संपत्ति अधिग्रहण से सुरक्षा

बीआईए निवेशकों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपत्ति अधिग्रहण से बचाता है।राज्य की ओर से निवेश का अधिग्रहण केवल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए,उचित प्रक्रिया के अनुसार बिना किसी भेदभाव के और तुरंत व उचित मुआवजे के बदले ही किया जा सकता है। समझौता यह तय करने के लिए विस्तृत मानदंड भी तय करता है कि क्या अप्रत्यक्ष संपत्ति अधिग्रहण हुआ है।

इंवेस्टमेंट फंड की आसान आवाजाही

यह समझौता निवेशकों को पूंजी,मुनाफा,लाभांश,रॉयल्टी, पूंजीगत लाभ और निवेश की बिक्री से हासिल रकम को स्वतंत्र रूप से ट्रांसफर करने की अनुमति देता है।हालांकि दोनों देशों के पास अपने घरेलू कानूनों के तहत‌ भुगतान संतुलन के संकट या असाधारण मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियों के दौरान अस्थायी प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

बेहतर पारदर्शिता की बात

बीआईए के तहत दोनों देशों को निवेश से जुड़े कानूनों,नियमों और प्रशासनिक उपायों को प्रकाशित करना होगा,जहां भी संभव हो नए उपाय लागू करने से पहले संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) से राय लेने का मौका देना होगा।साथ ही निवेशकों को घरेलू कानूनों का पालन करना होगा,इसमें टैक्स, भ्रष्टाचार-रोधी प्रावधान और जानकारी देने की जरूरतें शामिल हैं।यह समझौता निवेशकों को सरकारी अधिकारियों को अनुचित लाभ देने से भी रोकती है।सरकारों को रेगुलेटरी उद्देश्यों के लिए निवेश से जुड़ी जानकारी मांगने की इजाजत देती है।

विवाद सुलझाने का नया फ्रेमवर्क

यह समझौता निवेशक-राज्य विवाद निपटान का एक व्यवस्थित तरीका पेश करता है,लेकिन सबसे पहले घरेलू कानूनी प्रणालियों के जरिये विवादों को सुलझाने पर ज्‍यादा जोर देता है।अंतरराष्‍ट्रीय मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) शुरू करने से पहले निवेशकों को सबसे पहले घरेलू अदालतों या प्रशासनिक निकायों से संपर्क करना होगा। सिवाय उन सीमित परिस्थितियों के जहां स्थानीय उपाय उपलब्ध नहीं हैं।एग्रीमेंट में मध्यस्थता शुरू होने से पहले छह महीने की बातचीत की अवधि भी जरूरी है।निवेश विवादों की थर्ड-पार्टी फंडिंग पर रोक है। तय शर्तों को पूरा करने के बाद योग्य विवाद ICSID या UNCITRAL मध्यस्थता नियमों के तहत आगे बढ़ सकते हैं।

कारोबारों के लिए इसका मतलब

कारोबारों और संस्थागत निवेशकों के लिए बीआईए निवेश पर बेहतर कानूनी निश्चितता प्रदान करता है।साथ ही मनमाने सरकारी कदमों के जोखिम को घटाता है। निवेशकों की सुरक्षा और सरकारों के लिए साफ तौर पर परिभाषित रेगुलेटरी शक्तियों को मिलाकर इस समझौते का उद्देश्य भारत और इजरायल के बीच टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में लॉन्‍ग टर्म इंवेस्‍टमेंट फ्लो को बढ़ावा देना है।अपडेट किया गया फ्रेमवर्क भारत की बदलती इंवेस्‍टमेंट ट्रीटी पॉलिसी को भी दिखाता है। इसका उद्देश्य घरेलू नीतिगत प्राथमिकताओं को पूरा करने की सरकार की क्षमता से समझौता किए बिना विदेशी निवेश की रक्षा करना है। अब जब यह समझौता लागू हो गया है तो उम्मीद है कि दोनों देशों के कारोबारों को अधिक स्थिर और पारदर्शी निवेश व्यवस्था से लाभ होगा।


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