श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा देते ही चंपत राय पर कसा शिकंजा,पुलिस ने की पूछताछ,दर्ज किया बयान


श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा देते ही चंपत राय पर कसा शिकंजा,पुलिस ने की पूछताछ,दर्ज किया बयान

धनंजय सिंह | 29 Jun 2026

 

अयोध्या।राम मंदिर दान चोरी मामले में पुलिस अब
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर शिंकजा कस रही है।ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफा देते ही उनसे भी पुलिस ने पूछताछ की और बयान दर्ज किया है। बरहाल पुलिस की एफआईआर में चंपत राय या किसी पदाधिकारी का नाम नहीं है।जांच को आगे बढ़ाने और चोरी में पकड़े गए आरोपियों की गतिविधियों को लेकर जानकारी ली गई है।एसआईटी ने भी सबसे पहले चंपत राय से ही पूरे मामले पर जानकारी ली थी और बयान दर्ज किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद ही पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

सूत्रों के मुताबिक जांच के अगले चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य प्रमुख पदाधिकारियों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे।इसमें डॉक्टर अनिल मिश्रा,गोपाल राव के भी नाम शामिल हैं।मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए क्रमवार संबंधित लोगों से पूछताछ हो रही है। इसी कड़ी में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके। बता दें कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने शनिवार को ही अपने पदों से इस्तीफा दिया था।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ही तहरीर पर आठ लोगों को नामजद करते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज करते हुए शुक्रवार को सभी को गिरफ्तार किया था।आरोपियों के घरों पर रविवार को ताबड़तोड़ छापेमारी हुई थी।इस छापेमारी में ज्वैलरी,कैश और जमीनों के दस्तावेज बरामद होने की बात कही जा रही है।

ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र के इस्तीफे के तरीके को लेकर भी रामनगरी के संत समाज में कई तरह के सवाल उठाए गए।संतों का कहना है कि चंपत राय के इस्तीफे का तरीका सामान्य प्रक्रिया से अलग दिखाई देता है। उनका तर्क था कि चंपत राय स्वयं सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं,उनका अपना एक्स और फेसबुक अकाउंट है,ऐसे में यदि वे इस्तीफा देते, तो कम से कम एक संक्षिप्त संदेश के माध्यम से रामभक्तों और आम लोगों को जानकारी दे सकते थे। बरहाल यह भी कहा जा रहा है कि हाईकमान के निर्देश मिलते ही जल्दी ही चंपत राय सफाई के साथ सभी के सामने आएंगे।

संत समाज में यह चर्चा भी रही कि यदि इस्तीफा देना था तो उसे व्यक्तिगत रूप से ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपा जाना चाहिए था।महंत नृत्य गोपाल की ओर से ही इसकी पुष्टि की जानी चाहिए।संत समाज में यह सवाल भी उठाया गया कि किसी ट्रस्ट का महासचिव इस्तीफा देता है तो वह कोषाध्यक्ष को क्यों देगा। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष को ही संबोधित किया जाना चाहिए। इन तमाम सवालों के बीच ट्रस्ट के अंदर चल रहे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।अब वस्तुस्थिति 11 जुलाई की बैठक में ही सामने आएगी।


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