6 महीने में पहली बार घुटनों पर आया चीन,औद्योगिक रफ्तार धीमी,कंपनियों का मुनाफा सुस्त,भारत के लिए हो सकता है बड़ा मौका


6 महीने में पहली बार घुटनों पर आया चीन,औद्योगिक रफ्तार धीमी,कंपनियों का मुनाफा सुस्त,भारत के लिए हो सकता है बड़ा मौका

मनोज बिसारिया | 28 Jun 2026

 

नई दिल्ली।चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बादल एक बार फिर गहराने लगे हैं।मजबूत निर्यात और फैक्ट्री-गेट कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू बाजार में कमजोर मांग के कारण चीन के औद्योगिक मुनाफे की रफ्तार छह महीनों में पहली बार धीमी पड़ गई है।चीन के ये आंकड़े भारत के लिए भी काफी मायने रखते हैं।यह भारत के लिए बड़ा मौका हो सकता है।

चीन पर आर्थिक संकट,भारत के पास बड़ा मौका

चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 में औद्योगिक मुनाफा पिछले साल की तुलना में 21.1 प्रतिशत बढ़ा।हालांकि यह आंकड़ा सकारात्मक दिख रहा है,लेकिन यह अप्रैल महीने में दर्ज की गई 24.7 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले काफी कम है।

अनुमान से कम रही मुनाफे की रफ्तार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 के पहले पांच महीनों (जनवरी से मई) के दौरान चीन का औद्योगिक मुनाफा कुल मिलाकर 18.8 प्रतिशत बढ़ा,जो ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के 19 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा कम है।यह सुस्ती बेहद चौंकाने वाली है,क्योंकि इसी साल मार्च में चीन तीन साल से अधिक समय बाद फैक्ट्री डिफ्लेशन (उत्पादन में मंदी) के दौर से बाहर निकला था और मई में उत्पादक कीमतें साल 2022 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ी थीं।

कंपनियों की कमाई पर असर

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में चल रहे भारी निवेश और मिडिल ईस्ट संकट के कारण ऊर्जा बाजारों में आई तेजी से चीन के एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग गुड्स की मांग विदेशों में काफी मजबूत रही,लेकिन चीन के अंदर घरेलू निवेश में भारी गिरावट और चीनी परिवारों द्वारा खर्च में की जा रही कटौती के चलते कंपनियों की कुल कमाई पर इसका बुरा असर पड़ा।विदेशों से मिली मजबूती,घरेलू बाजार की इस कमजोरी को छिपा नहीं सकी।

अभी भी नीचे मुनाफा 

जनवरी से मई के बीच चीनी औद्योगिक कंपनियों ने कुल 3.14 लाख करोड़ युआन (करीब 462 अरब डॉलर) कमाए।
मई महीने में दिख रही 21.1 प्रतिशत की बढ़त का एक कारण यह भी है कि पिछले साल चीन का औद्योगिक मुनाफा 9.1प्रतिशत तक गिर गया था। वर्तमान मुनाफा अभी भी साल 2022 के समान स्तर से काफी नीचे है।

भारत पर क्या असर

चीन के घरेलू बाजार में सुस्ती का असर भारत पर भी दिखाई दे सकता है।जब चीन के लोग सामान नहीं खरीद रहे हैं,तो वहां की कंपनियां घाटे से बचने के लिए अपना अतिरिक्त माल (जैसे स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स) बहुत कम दामों पर भारतीय बाजारों में डंप यानी सस्ते में बेच सकती हैं,इससे भारत के घरेलू निर्माताओं को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल भारत सरकार ऐसी स्थिति से निपटने के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी (अतिरिक्त टैक्स) लगाने के लिए तैयार रहती है।

भारत के पास मौका ही मौका

वैश्विक कंपनियां जो अब तक पूरी तरह चीन पर निर्भर थीं,वे चीन + 1 की रणनीति के तहत भारत का रुख तेज कर सकती हैं,इससे भारत के मेक इन इंडिया और पीएलआई स्कीम को इससे और मजबूती मिलेगी।इलेक्ट्रॉनिक्स,एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भारत चीन के विकल्प के रूप में उभर सकता है।वहीं दूसरी ओर चीन में मांग कमजोर रहने से वैश्विक स्तर पर कच्चे माल और धातुओं (लोहा, तांबा आदि) की कीमतें बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेंगी।भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और धातुएं आयात करता है। वैश्विक कीमतों में स्थिरता रहने से भारत को अपनी महंगाई को काबू में रखने में मदद मिलेगी।


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