प्रयागराज/मुजफ्फरनगर/बागपत/बरेली/रामपुर।सूबे की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में तीन मंजिला बिल्डिंग में सोमवार दोपहर भीषण आग लगने से 15 लोगों ने जान गंवाई, इसमें अधिकांश छात्र थे।इस भीषण अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक केंद्रों में हड़कंप मच गया है।बुधवार को प्रयागराज के सिविल लाइंस के मिश्रा भवन चौराहे के पास नियमित निरीक्षण के लिए पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम को देखकर एक कोचिंग संचालक ने डरकर इमारत का मुख्य गेट अंदर से बंद कर लिया।जिस समय संचालक ने गेट पर ताला लगाया उस समय अंदर कोचिंग के कर्मचारी, प्रबंधन से जुड़े लोग और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं थे।
आधे घंटे तक बाहर रुके रहे अफसर
जांच अधिकारियों को लगभग आधे घंटे तक बाहर ही रोक दिया गया,इससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।गेट बंद होने और बाहर अधिकारियों की फौज देखकर अंदर मौजूद छात्र भी सहम गए।देखते ही देखते चौराहे पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई। भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा था। हालात बिगड़ते देख तत्काल सिविल लाइंस पुलिस को इस पूरे घटनाक्रम की सूचना दी गई।मौके पर पहुंची पुलिस ने मोर्चा संभाला और कोचिंग संचालक से सख्त लहजे में बातचीत कर मुख्य गेट को खुलवाया,इसके बाद ही फायर ब्रिगेड की टीम अंदर घुस सकी।
नियमों को ताक पर रखकर चल रहे थे कई संस्थान
अधिकारियों ने जब अंदर जाकर जांच पड़ताल की तो नियमों को ताक पर रखकर कई तरह के संस्थान संचालित होते पाए गए। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस इमारत में पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट के साथ-साथ कंप्यूटर कोर्स और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां भी समानांतर रूप से चल रही थीं,जिसके कारण यहां रोजाना सैकड़ों छात्र-छात्राओं का आना-जाना लगा रहता है।इतनी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की मौजूदगी के बावजूद इमारत के उपयोग,उसके स्वीकृत मानचित्र और सबसे महत्वपूर्ण अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर कमियां दिखी।गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत प्रयागराज विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को भी मौके पर बुला लिया,जिन्होंने इमारत की वैधानिक स्थिति की जांच शुरू की।
15 संस्थानों को मिला 7 दिनों का अल्टीमेटम
प्रयागराज के मुख्य अग्निशमन अधिकारी सचंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि कल हम लोगों ने कुल 23 संस्थान चेक किए थे, जिनमें से 15 में कुछ कमी पाई गई थी,उन 15 संस्थानों को हमारे द्वारा नोटिस निर्गत कर दिए गए हैं और 7 दिन का समय दिया गया है,उन्हें बोला गया है कि 7 दिन में ये कमियां पूरी करते हुए हमको अवगत कराएं,जिससे टीम दोबारा चेक कर ले।इस कार्रवाई के लिए लगातार 9 टीमें पूरे कमिश्नरेट में काम कर रही हैं।आज सुबह से जो सिविल लाइंस की टीम यहां पर है,मैं स्वयं भी इनके साथ आज यहां देखने के लिए आया था।
8 टीमें अलग-अलग तहसीलों में कर रहीं जांच
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सचंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि प्रभारी आज अपनी टीम के साथ यहां उपस्थित हैं और लगातार कार्रवाई को अंजाम दे रहे हैं।बाकी 8 टीमें अलग-अलग तहसीलों में लगी हुई हैं और वहां भी ऐसे ही औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारी टीम यहां नियमित निरीक्षण के लिए पहुंची थी,लेकिन संस्थान द्वारा मुख्य गेट बंद कर दिया गया,जिसके बाद सिविल लाइंस पुलिस और पीडीए के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। जांच के दौरान सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई मेडीजोन पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट पर देखने को मिली।मौके पर मौजूद प्रयागराज विकास प्राधिकरण के जोनल अधिकारी गंगेश कुमार सिंह ने इस संस्थान की अवैध स्थिति और सीलिंग की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
नक्शा और एनओसी दिखाने में नाकाम रहे संचालक
गंगेश कुमार सिंह ने कहा कि यह बिल्डिंग बेसमेंट और जी प्लस टू मंजिल की निर्मित है,जो तकरीबन 1000 स्क्वायर मीटर के प्लॉट एरिया पर बनी है,इसमें लगभग 4000 स्क्वायर फीट के आसपास फ्लोर तैयार करके इन लोगों को दिया गया है,इसके बेसमेंट में पार्किंग है,ग्राउंड फ्लोर पर एक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट और गर्ल्स हॉस्टल भी है,फर्स्ट फ्लोर पर इनका पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट चल रहा है और सेकंड फ्लोर पर लगभग 8 पार्टनर हैं जो लोग यहां रहते हैं।यह पूरी की पूरी बिल्डिंग मानकों के विपरीत पाई गई है क्योंकि ज़िम्मेदार लोग इसका कोई स्वीकृत नक्शा नहीं दिखा पाए और न ही कोई एनओसी प्रस्तुत कर सके।बिल्डिंग को मानकों के अनुरूप न पाते हुए तत्काल प्रभाव से सील किया जा रहा है।अभियान के तहत अब तक यह 5वां संस्थान है,जिसे नियमों की अनदेखी के कारण सील किया गया है।अन्य चीज़ों की भी गहनता से जांच की जाएगी और जांच के आधार पर आगे और भी कार्रवाई की जाएगी।
प्रयागराज में छात्रों की जान से खिलवाड़
बता दें कि प्रशासन की इस संयुक्त और ताबड़तोड़ कार्रवाई से साफ है कि आने वाले दिनों में अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटरों,लाइब्रेरियों,हॉस्टलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर शिकंजा और कसने वाला है।अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि छात्रों की जान से खिलवाड़ करने वाले और मानकों की अनदेखी करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।
मुजफ्फरनगर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब मुजफ्फरनगर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौड़ के नेतृत्व में एक विशेष चेकिंग अभियान चला।इस अभियान में प्रशासन, अग्निशमन विभाग,बिजली विभाग और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी में औचक निरीक्षण किया।जांच के दौरान कई संस्थानों में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी सामने आई, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो कोचिंग सेंटरों को मौके पर ही सील कर दिया।
लिंक रोड और भोपा रोड पर हुई चेकिंग
मुजफ्फरनगर प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन पूरे शहर में व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है।बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौड़ के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने लिंक रोड और भोपा रोड सहित शहर के कई प्रमुख कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी का बारीकी से निरीक्षण किया। इस बड़े अभियान में मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग कुमार,बिजली विभाग और एमडीए के वरिष्ठ अधिकारी भी दल-बल के साथ शामिल रहे।संयुक्त टीम ने संस्थानों में अग्निशमन उपकरण,विद्युत सुरक्षा, आपातकालीन निकास,भवन संरचना और अन्य तय सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच की।
अनियमितताएं मिलने पर नोटिस और सीलिंग
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग कुमार ने बताया कि जांच में कुल 5 संस्थानों में विभिन्न प्रकार की बेहद गंभीर कमियां सामने आईं,जिन संस्थानों में अग्निशमन व्यवस्था सुचारू नहीं मिली या आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा प्रबंध मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए,उन्हें तत्काल नोटिस जारी किया जा रहा है।गंभीर अनियमितताओं के चलते दो कोचिंग सेंटरों को बिना कोई मोहलत दिए तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है।उन्होंने बताया कि बेसमेंट में संचालित गतिविधियों और अत्यधिक भीड़ वाले संस्थानों की विशेष निगरानी की जा रही है।बता दें कि जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और आने वाले दिनों में भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
बागपत के बड़ौत में 18 कोचिंग सील
बागपत में भी छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बुधवार को बड़ौत नगर के खत्री गढ़ी क्षेत्र में प्रशासन,दमकल विभाग और विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग डेढ़ दर्जन कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया।इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालकों में हड़कंप मच गया।बागपत प्रशासन ने भी इस बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया।
कोचिंग हब खत्री गढ़ी में अफरा-तफरी
यह बड़ा अभियान एसडीएम भावना सिंह,सीएफओ अमरेंद्र प्रताप सिंह और सीओ अंशु जैन के संयुक्त नेतृत्व में चलाया गया।बड़ौत शहर के खत्री गढ़ी,जिसे कोचिंग सेंटर्स का हब कहा जाता है।यहां टीम ने गहन जांच-पड़ताल कर सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी।जांच के दौरान कई नामचीन संस्थान निर्धारित सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी करते हुए पाए गए।यहां ऊपरी मंजिल पर जाने के लिए संकरी सीढ़ियों के रास्ते मिले और कई आवासीय घरों के भीतर ही अवैध रूप से कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी तक संचालित होती हुई मिलीं।
90 फीसदी कोचिंग सेंटर्स के पास कागज नहीं
अधिकारियों ने पाया कि कुछ कोचिंग सेंटर बिना पर्याप्त अग्निशमन उपकरणों,आपातकालीन निकासी व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे थे।छात्रों की सुरक्षा के साथ सरासर समझौता किए जाने पर बागपत प्रशासन ने तत्काल सीलिंग की सख्त कार्रवाई की। इस अभियान के तहत डायमंड कोचिंग सेंटर, नेचर कोचिंग सेंटर और बालाजी कोचिंग सेंटर समेत कई अन्य बड़े संस्थानों को सील किया गया। टीम के पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।कई कोचिंग और लाइब्रेरी संचालक अपने प्रतिष्ठानों पर ताला लगाकर मौके से भाग निकले।
DIOS की अनुमति के बिना संचालन
प्रशासन का कहना है कि छात्रों के जीवन से किसी प्रकार का जोखिम स्वीकार नहीं किया जाएगा और सुरक्षा मानकों का पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा।बिना मानकों के धड़ल्ले से छात्र-छात्राओं की जिंदगी को ताक पर रख संचालित हो रहे इन अवैध कोचिंग सेंटर्स पर जब प्रशासन का चाबुक चला तो 90 फीसदी केंद्र संचालकों के पास कागजात तक भी पूरे नहीं मिले।ज्यादातर संचालकों के पास तो जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से कोई अनुमति पत्र तक नहीं मिला। यहां पढ़ रहे बच्चों को टीम ने सुरक्षित बाहर निकालकर इन सभी सेंटर्स पर अपनी सील लगा दी।
संचालकों ने लगाया प्रताड़ना का आरोप
इस कार्रवाई के बीच अपटेक कंप्यूटर सेंटर की शिक्षिका नीशू का कहना था कि सीलिंग को लेकर प्रशासन द्वारा पहले से किसी भी तरह का नोटिस नहीं दिया गया था।उनका दावा था कि कोचिंग सेंटर पर सभी मानक पूर्ण थे और कागजात भी थे, उसके बावजूद सेंटर को सील कर दिया गया है।यह कंप्यूटर सेंटर करीब 30 साल पुराना है और यहां वर्तमान में 5 शिक्षक और 100 से अधिक छात्र कंप्यूटर की शिक्षा ग्रहण करते हैं। सेंटर के संचालक राजीव तोमर का कहना था कि उनके यहां उचित फायर फाइटिंग सिस्टम तक लगा हुआ था।
बिना सामान उठाए सेंटर्स किए गए बंद
आरोप है कि अधिकारियों ने अचानक उनके यहां आकर सभी बच्चों और शिक्षकों को बाहर निकाल दिया।संचालकों के मुताबिक,उन्हें न तो कोई पूर्व नोटिस दिया गया और न ही व्यक्तिगत सामान उठाने तक का अवसर प्रदान किया गया। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों का व्यवहार बेहद खराब था और वे कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं थे,इसी तरह के गंभीर आरोप दूसरे एक-दो कोचिंग सेंटर संचालकों ने भी स्थानीय प्रशासन पर लगाए हैं,जबकि दूर-दराज के गांवों से पढ़ने आने वाले बच्चों को भी सेंटर पर अचानक सील लगने के कारण काफी मानसिक और व्यावहारिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
बरेली में दो बड़े कोचिंग सेंटर सील
बरेली प्रशासन सुरक्षा मानकों को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है।बरेली विकास प्राधिकरण, पुलिस और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने दूसरे दिन भी शहर के विभिन्न कोचिंग संस्थानों का सघन निरीक्षण किया।जांच के दौरान कई गंभीर खामियां मिलने पर प्रशासन ने राजेंद्र नगर स्थित ओमेगा क्लासेस और मैट्रिक्स कोचिंग सेंटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया।निरीक्षण में सामने आया कि ओमेगा क्लासेस के पास न तो बीडीए की आवश्यक स्वीकृतियां थीं और न ही अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र मौजूद था।
आवासीय भवनों में व्यावसायिक खेल उजागर
जांच टीम ने पाया कि एक ही छोटे कमरे में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाकर कक्षाएं संचालित की जा रही थीं,जिससे किसी भी आपात स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता था।सुरक्षा मानकों के इस घोर उल्लंघन को देखते हुए संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।वहीं मैट्रिक्स कोचिंग सेंटर की जांच में पता चला कि जिस भवन में संस्थान संचालित हो रहा था,वह मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था।कोचिंग संचालन के लिए आवश्यक कॉमर्शियल मानचित्र और अन्य अनुमतियां प्राप्त नहीं की गई थीं।
संकरी सीढ़ियों से छात्रों की जान को खतरा
इसके अलावा भवन में फायर एनओसी का भी पूरी तरह से अभाव पाया गया।टीम को भवन में आग लगने जैसी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं मिले,जिसे गंभीर लापरवाही माना गया।आपातकालीन निकासी व्यवस्था और अग्निशमन उपकरणों की कमी को देखते हुए टीम ने इसे सील करने की कार्रवाई की।अभियान के दौरान अधिकारियों ने कई अन्य आवासीय भवनों में भी अवैध रूप से कोचिंग सेंटर संचालित होते पाए।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर एक्शन
कई स्थानों पर सीढ़ियों की चौड़ाई सरकारी मानकों से काफी कम मिली,जिससे आपात स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है।अधिकारियों ने इसे छात्रों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ बताया और कहा कि नियमों को दरकिनार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।ऐसे भवन स्वामियों और संस्थानों को चिन्हित कर बीडीए द्वारा लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं।इस बड़ी कार्रवाई के दौरान एसपी सिटी मानुष पारिख,एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी,बीडीए अधिकारी सीताराम और अग्निशमन अधिकारी मनु शर्मा सहित पूरी संयुक्त टीम मुस्तैद रही।
रामपुर में होटलों और अस्पतालों पर भी नजर
रामपुर में भी प्रशासन ने सुरक्षा मानकों की जांच तेज कर दी है।मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय कुमार सिंह,सिटी मजिस्ट्रेट,आरडीए के जेई और नगर पालिका की टीम ने शहर के कई कोचिंग सेंटरों का औचक निरीक्षण किया।इस दौरान कुछ कोचिंग सेंटर कार्रवाई के डर से बंद मिले,जबकि खुले हुए संस्थानों में फायर सेफ्टी के मानकों की गहन जांच की गई।निरीक्षण के दौरान टीम ने कोचिंग संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे फायर सेफ्टी से जुड़े सभी मानकों को जल्द से जल्द पूरा करें।
लापरवाही बरतने वालों को आखिरी चेतावनी
इमरजेंसी एग्जिट,निकासी मार्ग,अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा योजनाओं को सही तरीके से लागू करने के बाद ही संस्थानों का संचालन करने की अनुमति दी जाएगी।मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय कुमार सिंह ने बताया कि केवल कोचिंग सेंटर ही नहीं बल्कि होटल,अस्पताल,कमर्शियल और इंडस्ट्रियल भवनों का भी लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर अब तक करीब 6 से 7 कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं,इसके अलावा कई होटलों और अन्य संस्थानों को भी फायर सेफ्टी के मानक पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी।