होर्मुज स्ट्रेट के गेट पर फिर लटका ताला,भारत के लिए सीधा खतरा,मची सनसनी
मनोज बिसारिया | 20 Jun 2026
नई दिल्ली।होर्मुज के गेट पर फिर ताला लटक गया है।ईरान की शीर्ष सैन्य कमान ने होर्मुज स्ट्रेट को समुद्री यातायात के लिए बंद करने का आदेश दिया है।ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर हाल ही में हुए सीजफायर समझौते के तहत किए गए वादों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। अमेरिका और ईरान की बातचीत को स्थगित कर दिया गया। इसने ऑयल मार्केट में दोबारा सनसनी मचा दी है। यह भारत के लिए कतई अच्छी खबर नहीं है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक यह घोषणा खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने की। यह ईरान के सैन्य अभियानों का समन्वय करता है।सैन्य कमान ने इस कदम को अमेरिका की ओर से इस सप्ताह की शुरुआत में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन की शर्तों का पालन न करने और दक्षिणी लेबनान में जारी इजरायली सैन्य अभियानों का सीधा जवाब बताया।
होर्मुज का बंद होना क्यों मायने रखता है
होर्मुज दुनिया के सबसे अहम एनर्जी ट्रांजिट कॉरिडोर में से एक है।यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से जोड़ता है।दुनिया भर में कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस के एक्सपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है।इसलिए इसमें किसी भी तरह की रुकावट एनर्जी मार्केट और ग्लोबल ट्रेड के लिए बड़ी चिंता का विषय होती है।
खुलने की खबर के भरभराए थे क्रूड के दाम
होर्मुज खुलने की खबर के बाद से क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार गिरावट बनी हुई थी।बीते रोज क्रूड ऑयल की कीमत 3.5 महीने के निचले स्तर पर आ गई थी। बुधवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अमेरिका-ईरान तनाव को खत्म करने के लिए एक शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर करने से होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया था। इससे लाखों बैरल तेल का निर्यात दोबारा शुरू हो गया था। इससे ग्लोबल तेल सप्लाई में बढ़ोतरी हुई है।हालांकि अब इसके दोबारा बंद होने से फिर पुराना खतरा मंडराने लगा है। भारत कच्चे तेल की कीमतों के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील है।
भारत के लिए मतलब
ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने से भारत पर सीधा और दोहरा असर पड़ेगा।भारत अपनी जरूरत का 88 फीसदी कच्चा तेल और करीब 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है। इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी चोकपॉइंट से होकर गुजरता है।इस नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़ेंगी। इससे भारत का आयात बिल और चालू खाता घाटा बढ़ेगा। इसके चलते देश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ सकते हैं। इससे थोक और खुदरा महंगाई बढ़ेगी। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होगा। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आएगा।
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