अमेरिका से क्यों अकड़ रहा इजरायल,देखिए विश्व के अमीरों की लिस्ट,खत्म हो जाएगा सारा कनफ्यूजन


अमेरिका से क्यों अकड़ रहा इजरायल,देखिए विश्व के अमीरों की लिस्ट,खत्म हो जाएगा सारा कनफ्यूजन

मनोज बिसारिया | 17 Jun 2026

 

नई दिल्ली।जगजीत सिंह की एक बहुत चर्चित गजल है।बात निकली है तो दूर तलक जाएगी..कुछ ऐसी ही बात ईरान के साथ अमेरिका के शांति समझौते से निकलकर आ रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समझौते पर अपना अलग रुख बनाए हुए हैं।इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा खुद करेगा।इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच तनाव पैदा हो गया है, लेकिन इजरायल की इस अकड़ के पीछे विश्व के वो पांच सबसे बड़े यहूदी अमीर हैं,जो विश्व के टॉप-10 अमीरों में शामिल हैं।

ब्लूमबर्ग ने विश्व के टॉप-100 अमीरों की सूची जारी की

ब्लूमबर्ग ने विश्व के टॉप-100 अमीरों की सूची जारी की है। इस सूची में टॉप-10 में शामिल ये यहूदी अमीर हैं डेल टेक्नोलॉजीज के फाउंडर माइकल डेल,ओरेकल के को-फ़ाउंडर लैरी एलिसन,गूगल और अल्फाबेट के को-फ़ाउंडर लैरी पेज,फेसबुक मार्क जकरबर्ग,गूगल के को फाउंडर सर्गेई ब्रिन। ऐसे में इजरायल का अकड़ना लाजिमी है। वैसे भी अक्टूबर में इजरायल में आम चुनाव होने हैं,जिसमें बड़ी मात्रा में धन-बल की जरूरत होगी।

लैरी पेज: विश्व के दूसरे नंबर के अमीर,नेटवर्थ 317 बिलियन डॉलर

ब्लूमबर्ग की टॉप-10 अमीरों की सूची में दूसरे नंबर पर गूगल और अल्फाबेट के को-फ़ाउंडर लैरी पेज हैं,जिनकी कुल नेटवर्थ 317 बिलियन डॉलर है।लैरी पेज से पहले सूची में पहले नंबर पर काबिज टेस्ला के मालिक एलन मस्क हैं,जो 1.32 ट्रिलियन डॉलर नेटवर्थ के साथ दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन चुके हैं।लैरी पेज अपनी मां की तरफ से यहूदी मूल के हैं। उनकी मां ग्लोरिया कंप्यूटर साइंस की टीचर हैं और यहूदी हैं। उनके नाना बाद में इजरायल चले गए थे। वहीं पिता की तरफ से लैरी पेज के पिता कार्ल कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर हैं और प्रोटेस्टेंट पृष्ठभूमि से थे।

सर्गेई ब्रिन:गूगल के को फाउंडर, नेटवर्थ 295 बिलियन डॉलर

गूगल के को फाउंडर सर्गेई ब्रिन यहूदी हैं।ब्लूमबर्ग की लिस्ट में वह टॉप-10 अमीरों में दुनिया में तीसरे नंबर पर हैं। उनकी कुल नेटवर्थ 295 बिलियन डॉलर है।सर्गेई ब्रिन का जन्म 1973 में सोवियत संघ के मॉस्को में एक यहूदी परिवार में हुआ था। रूस में यहूदियों के खिलाफ होने वाले भेदभाव से बचने के लिए उनका परिवार 1979 में अमेरिका चला गया।
हालांकि उनके पिता ने अपनी यहूदी विरासत को पूरी तरह धार्मिक न मानकर मुख्य रूप से जातीय और आनुवंशिक बताया है, फिर भी ब्रिन अपनी जड़ों से जुड़े रहे हैं।वे अक्सर प्रभावशाली यहूदी बिजनेस लीडर्स की लिस्ट में शामिल होते हैं। जैसे कि फोर्ब्स इजरायल और यरूसलम पोस्ट द्वारा जारी की जाने वाली लिस्ट में भी वह शामिल रहते हैं।

लैरी एलिसन: ओरेकल के को फाउंडर, नेटवर्थ 243 बिलियन डॉलर

ओरेकल के को-फ़ाउंडर लैरी एलिसन यहूदी मूल के हैं। ब्लूमबर्ग की लिस्ट में टॉप-10 अमीरों में वह पांचवें नंबर पर हैं। उनकी कुन नेटवर्थ 243 बिलियन डॉलर है।लैरी एलिसन का जन्म न्यूयॉर्क शहर में एक यहूदी मां से हुआ था और शिकागो में उनके यहूदी पालक माता-पिता ने उनकी परवरिश की।हालांकि वे अपनी विरासत से सांस्कृतिक रूप से जुड़े हुए हैं, लेकिन उन्होंने अक्सर खुद को धर्म के प्रति संशयवादी बताया है और वे यहूदी धर्म की खास मान्यताओं को नहीं मानते हैं।

माइकल डेल: डेल टेक्नोलॉजीज के फाउंडर, नेटवर्थ 216 बिलियन डॉलर

डेल टेक्नोलॉजीज के फाउंडर माइकल डेल यहूदी हैं। ब्लूमबर्ग की दुनिया की टॉप 100 अमीरों की सूची में माइकल डेल छठें पायदान पर हैं।माइकल डेल का जन्म ह्यूस्टन, टेक्सास में एक यहूदी परिवार में हुआ था और उनकी परवरिश यहूदी धर्म को मानते हुए हुई थी।

मार्क जकरबर्ग: फेसबुक के संस्थापक, नेटवर्थ 214 बिलियन डॉलर

फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग यहूदी हैं। ब्लूमबर्ग की दुनिया के टॉप 100 अमीरों की सूची में जकरबर्ग सातवें नंबर पर हैं। उनकी नेटवर्थ 214 बिलियन डॉलर है।मार्क जकरबर्ग का जन्म न्यूयॉर्क में यहूदी माता-पिता के घर हुआ था और उनकी परवरिश एक रिफॉर्म यहूदी परिवार में हुई थी। यहां तक कि उनका बार मित्जवा समारोह भी स्टार वॉर्स थीम पर आधारित था।

क्यों अड़ रहे हैं नेतन्याहू,क्या है मामला

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते ने नेतन्याहू के राजनीतिक करियर के तीन मजबूत आधारों को तोड़ दिया है और देश की सुरक्षा को लेकर उन्हें एक नई दुविधा में फंसा दिया है।दरअसल जिस शख़्स ने खुद को अमेरिका का एक राजनीतिक क़रीबी और अमेरिकी राजनेताओं पर वास्तविक प्रभाव रखने वाला बताया हो,उसे अमेरिका ने व्यापक रूप से दरकिनार कर दिया और उनका सार्वजनिक रूप से अपमान भी किया।कुछ ही महीनों में इजरायल में आम चुनाव होने हैं। अमेरिका और ईरान की मांग है कि इजरायल लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमला करना बंद कर दे। ऐसी मांग से इजरायल के मिस्टर सिक्योरिटी के रूप में नेतन्याहू की पुरानी, दागदार राजनीतिक छवि कैसे बच सकती है।

अमेरिका से टकराने के मूड में इजरायली नेता

बीते सोमवार को इजरायली संसद नेसेट में विपक्षी नेता याएर लैपिड ने नेतन्याहू के सामने बचे विकल्पों के बारे में कुछ इस तरह बताया-या तो हमारे सबसे बड़े साथी (अमेरिका) के साथ सीधी और हमें नुकसान पहुंचाने वाली टक्कर हो,या फिर इजरायली हितों के साथ समझौता कर लिया जाए।इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को फटकार लगाते हुए कहा था कि बीते दिनों बेरूत पर हमले का आदेश देते समय उन्होंने कोई समझदारी नहीं दिखाई।

नेतन्याहू की अपनी लिकुड पार्टी के सदस्यों और सरकार में उनके गठबंधन में मौजूद कट्टर दक्षिणपंथी कैबिनेट मंत्रियों के बयानों से भी पता चलता है कि उन पर कितना दबाव है।
यह दबाव सबसे ज्यादा ईरान की इस मांग को लेकर है कि सीजफायर समझौते में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर मिलिट्री ऑपरेशन बंद होना शामिल हो।इजरायल के कट्टर दक्षिणपंथी नेता नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन-ग्विर ने सोमवार को सोशल मीडिया पर लिखा-हम ट्रंप के समझौते से बंधे नहीं हैं। हम इस समझौते के साझेदार नहीं हैं जो हमारी सुरक्षा पक्का नहीं करता।


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