नई दिल्ली।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वेनेजुएला से भारत की करीबी बेहद बढ़ गई है।भारत और वेनेजुएला का अब कच्चे तेल का कारोबार बढ़ाने पर बड़ा फोकस है।इसी सिलसिले में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज 3 से 7 जून तक पांच दिनों के भारत दौरे पर रहीं।इस दौरान डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की।
इस यात्रा का मुख्य मकसद भारत को सस्ते तेल की सप्लाई बढ़ाना है
इस यात्रा का मुख्य मकसद भारत को सस्ते तेल की सप्लाई बढ़ाना है,ताकि खाड़ी देशों पर तेल निर्भरता को कम किया जा सके।इस यात्रा के दौरान भारत और वेनेजुएला के रिश्तों के सभी पहलुओं पर बातचीत हुई।भारत और वेनेजुएला ने ऊर्जा सुरक्षा,व्यापार,निवेश,दवाओं और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सहमति जताई।साथ ही ट्रांसपोर्ट और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भी नए मौके तलाशने की बात कही गई।बता दें कि डेल्सी रोड्रिग्ज पहले भी वेनेजुएला की विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति के तौर पर भारत आ चुकी हैं। डेल्सी रोड्रिग्ज 2015 में विदेश मंत्री के रूप में भारत आई थीं,इसके बाद उन्होंने चार बार उपराष्ट्रपति के तौर पर भारत का दौरा किया,यह उनका छठा भारत दौरा था।
भारत से क्या चाहती हैं डेल्सी रोड्रिग्ज
वेनेजुएला की कमान संभालने के छह महीने बाद ही भारत दौरे पर आईं डेल्सी रोड्रिग्ज चाहती हैं कि भारत उनके देश से भारी मात्रा में तेल खरीदे,इससे वहां की कमजोर पड़ चुकी अर्थव्यवस्था को संभालने में बड़ी मदद मिलेगी।दूसरी तरफ मध्य-पूर्व के बढ़ते टकराव ने भारत को भी खाड़ी देशों पर तेल निर्भरता कम करने के लिए मजबूर किया है,यही वजह है कि भारत ने हाल के महीनों में वहां से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है,जिससे यह दक्षिण अमेरिकी देश हमारे लिए एक अहम तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
समुद्री विश्लेषण फर्म केप्लर के मुताबिक....
समुद्री विश्लेषण फर्म केप्लर के मुताबिक मई में वेनेजुएला भारत को कच्चे तेल की सप्लाई करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश था,उस वेनेजुएला प्रतिदिन लगभग 2 लाख 66 हजार बैरल तेल की आपूर्ति कर रहा था,जो भारत के कुल आयात का लगभग 5.3 फीसदी था।तब केवल रूस,यूएई,सऊदी अरब और ब्राजील ही भारत को इससे ज्यादा तेल बेच रहे थे। जून में यह मात्रा बढ़कर 4 लाख 27 हजार बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई है,इसके साथ ही वेनेजुएला इस महीने भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
इस बढ़ोतरी का दो बड़े कारण
इस बढ़ोतरी का दो बड़े कारण हैं।पहला पश्चिम एशिया की जंग और होर्मुज स्ट्रेट संकट से सप्लाई प्रभावित होना है। दूसरा वेनेजुएला का भारी और हाई-सल्फर वाला कच्चा तेल काफी सस्ता होना है।रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियां इसे आसानी से प्रोसेस कर लेती हैं, इसलिए उन्होंने इसकी खरीद बढ़ा दी है।साल 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों से आयात रुकने से पहले वेनेजुएला भारत के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक था,लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत ने वेनेजुएला से तेल की खरीद लगभग बंद कर दी थी। अब वेनेजुएला में राजनीतिक हालात बदल चुके हैं और अमेरिका खुद भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के पास है विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार है।एक अनुमान के मुताबिक वेनेजुएला में 303 अरब बैरल तेल भंडार है।यह विश्व के ज्ञात तेल संसाधनों का करीब 17 फीसदी है।यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी बड़ा माना जाता है,हालांकि कई साल से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक उथल-पुथल ने वेनेजुएला के तेल उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन
बता दें कि इस साल की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया था।मादुरो और उनकी पत्नी को सीधे यूएस ले जाया गया,ताकि वहां उनके खिलाफ काम करने के आरोप में उन पर मुकदमा चलाया जा सके।सत्ता से हटाए गए मादुरो चीन-रूस के बेहद करीबी माने जाते थे।यही कारण है कि मादुरो लंबे समय से अमेरिकी प्रशासन की आंखों में खटक रहे थे।मादुरो को पद से हटाए जाने के बाद उपराष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कीसाथ ही वो अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ भी संबंध मजबूत करने में जुटी हुई हैं।