भारत फिर खरीदेगा रूस का अचूक S-400 मिसाइल सिस्टम,चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन


भारत फिर खरीदेगा रूस का अचूक S-400 मिसाइल सिस्टम,चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन

मनोज बिसारिया | 27 May 2026

 

नई दिल्ली।भारत और रूस के बीच बेहद ताकतवर S-400 लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (हवाई सुरक्षा प्रणाली) की अतिरिक्त खेप खरीदने को लेकर बातचीत चल रही है।रूस की सरकारी एजेंसी फेडरल सर्विस फॉर मिलिट्री-टेक्निकल कोऑपरेशन ने इसकी पुष्टि की है।यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब रूस और भारत के साथ 2018 में हुए पुराने 5.4 अरब डॉलर (लगभग 45,000 करोड़ रुपये) के ऐतिहासिक समझौते को पूरा करने की अंतिम चरण में है। इस डील के तहत भारत को कुल 5 S-400 सिस्टम मिलने थे, जिनमें से 3 सिस्टम रूस 2023 तक भारत को सौंप चुका है।

रूस की डिफेंस एजेंसी के प्रमुख दिमित्री शुगाएव ने ये बताया 

​रूस की डिफेंस एजेंसी के प्रमुख दिमित्री शुगाएव ने बताया कि अब यह डिलीवरी वापस अपने तय शेड्यूल पर आ गई है। बचे हुए दो सिस्टम में से एक इसी महीने और आखिरी सिस्टम इस साल नवंबर तक भारत को मिल जाएगा। ​FSVTS के मुताबिक भारत ने इन मिसाइल सिस्टम का एक और बैच (खेप) खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।रूस इसकी सप्लाई के लिए पूरी तरह तैयार है और इस सिलसिले में दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है।

​भारत का बड़ा डिफेंस प्लान

इसी साल मार्च में भारत के रक्षा मंत्रालय ने 5 और S-400 सिस्टम,ट्रांसपोर्ट विमान और रिमोट से चलने वाले स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (ड्रोन) खरीदने के लिए $25 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपये) के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी।यह कदम भारतीय सेना के आधुनिकीकरण (मॉडर्नाइजेशन) और पुराने हो चुके सोवियत काल के हथियारों पर निर्भरता कम करने की कोशिशों का हिस्सा है।

​हथियारों के बाजार में भारत का रुख

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक (इंपोर्टर) देश है।पिछले 5 सालों में रूस से सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाले शीर्ष तीन देशों में अकेले भारत की हिस्सेदारी लगभग आधी रही है। हालांकि भारत अब सुरक्षा के मामले में किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता।यही वजह है कि हाल के सालों में भारत ने फ्रांस, इजराइल,अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों से रक्षा सौदे बढ़ाए हैं,इसके साथ ही सरकार मेक इन इंडिया के तहत देश के भीतर ही हथियारों के निर्माण और विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रही है।

S-400 की खासियत

भारतीय वायुसेना ने इसे सुदर्शन चक्र नाम दिया है,इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अकेले ही आसमान में भारत के दुश्मनों के लिए नो-फ्लाई ज़ोन बना सकता है।

400 किलोमीटर की मारक क्षमता

​S-400 आसमान में 400 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन्स को ट्रैक करके हवा में ही तबाह कर सकता है,इसकी मिसाइलें 30 किलोमीटर की ऊंचाई (करीब 1,00,000 फीट) तक जाकर टारगेट को मार गिराने में सक्षम हैं।

एक साथ कई मिसाइलें दागने की ताकत

​इस सिस्टम की सबसे अनोखी बात यह है कि इसकी एक ही बैटरी से 4 अलग-अलग रेंज वाली मिसाइलें दागी जा सकती हैं,बहुत लंबी दूरी 400 किमी तक मार करने वाली मिसाइल,लंबी दूरी 250 किमी तक मार करने वाली मिसाइल,​मध्यम दूरी 120 किमी तक मार करने वाली मिसाइल।​कम दूरी 40 किमी तक मार करने वाली मिसाइल।यह अलग-अलग परतों में सुरक्षा चक्र तैयार करता है,जिससे बचकर निकलना दुश्मन के लिए नामुमकिन हो जाता है।

सुपर आई’ रडार,600 किमी दूर से नजर

​इसका रडार बेहद पावरफुल है,जिसे जाम करना लगभग असंभव है।यह 600 किलोमीटर की दूरी से ही एक साथ 300 से ज्यादा टारगेट्स पर नजर रख सकता है,इसके साथ ही यह एक समय में 36 दुश्मनों पर एक साथ निशाना साधने और 72 मिसाइलें गाइड करने की क्षमता रखता है।

पलक झपकते ही एक्शन

​खतरे को भांपने के बाद S-400 का रिस्पॉन्स टाइम सिर्फ 9 से 10 सेकंड का है।यानी रडार पर खतरा दिखने के 10 सेकंड के भीतर मिसाइल फायर हो जाती है,इसकी मिसाइलें साउंड की स्पीड से भी 14 गुना ज्यादा तेजी से उड़ सकती हैं।

 शूट एंड स्कूट

​S-400 पूरी तरह से मोबाइल सिस्टम है,यानी इसके रडार, कमांड सेंटर और मिसाइल लॉन्चर बड़े ट्रकों पर तैनात होते हैं। इसे सिर्फ 5 मिनट के भीतर कहीं भी तैनात किया जा सकता है और हमला करने के तुरंत बाद वहां से हटाया जा सकता है,ताकि दुश्मन इसके ठिकाने पर जवाबी हमला न कर सके।


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