200 साल पहले काशी के कैसे दिखते थे घाट,हैरान कर देंगे ब्रिटिश आर्किटेक्ट जेम्स प्रिंसेप के स्कैच


200 साल पहले काशी के कैसे दिखते थे घाट,हैरान कर देंगे ब्रिटिश आर्किटेक्ट जेम्स प्रिंसेप के स्कैच

धनंजय सिंह | 26 May 2026

 

वाराणसी।आध्यात्मिक नगरी काशी पूरे विश्व में विख्यात है। काशी के खूबसूरत घाटों को देखने के लिए पूरे विश्व से लोग आते है।इन घाटों की खूबसूरती देखते ही बनती है।ये घाट इस काशी की पहचान बन चुके हैं।ब्रिटिश काल में भी काशी के ये घाट लोगों का मन मोह लेते थे।उस समय काशी के घाट कैसे दिखते थे,इसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट जेम्स प्रिंसेप ने अपने हुनर से कैद किया था। 

1830 के करीब जेम्स प्रिंसेप ने काशी के ऐतिहासिक घाटों और अन्य जगहों का तैयार किया था 

 1830 के करीब ब्रिटिश आर्किटेक्ट जेम्स प्रिंसेप ने आध्यात्मिक नगरी काशी के ऐतिहासिक घाटों और अन्य जगहों के स्कैचस तैयार किए।इन स्कैच से ही काशी का डॉक्यूमेशन तैयार किया गया।जेम्स प्रिंसेस की तैयार तस्वीरों से काशी 200 साल पहले कैसा दिखता था,लोग आज भी उसे देख पाते है।बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के हिस्ट्री ऑफ आर्ट डिपार्टमेंट में इन्हें सहेज कर रखा गया है। 18वीं और 19वीं शताब्दी के इन तस्वीरों में काशी के प्रमुख घाटों के स्कैच हैं। रामनगर की रामलीला,नाटी इमली के भरत मिलाप के अलौकिक दृश्य भी प्रिंसेप ने तैयार किए,इनकी संख्या 10 से ज्यादा हैं।

छूने की इजाजत किसी को नहीं

ब्रिटिश काल के समय काशी के डॉक्यूमेशन के लिए जेम्स प्रिंसेप ने इसे तैयार किया था।हिस्ट्री एंड आर्ट डिपार्टमेंट के पूर्व विभागाध्यक्ष इन तस्वीरों को एक एग्जीबिशन के लिए काशी लाए थे,उसके बाद से इन्हें बीएचयू में ही सहेज कर रखा गया है,इन दुर्लभ तस्वीरों को देखने और छूने की इजाजत किसी और को नहीं है।

कौन हैं जेम्स प्रिंसेप

जेम्स प्रिंसेप ब्रिटिश काल के मशहूर आर्किटेक्ट थे।प्रिंसेप ने ही अशोक के शासनकाल की खोज की थी। 1819 में प्रिंसेप भारत आये थे। 1889 में प्रिंसेप को कोलकाता में टकसाल अधिकारी बनाया गया था। 26 नवंबर 1920 में प्रिंसेप को बनारस का टकसाल अधिकारी बनाया गया,इसके बाद बनारस में रहकर यहां के घाट,मंदिर और ज्ञानवापी के स्कैच बनाए।ज्ञानवापी का प्रिंसेप का बनाया नक्शा आज भी सुरक्षित है,उनके नक्शे में ज्ञानवापी को मस्जिद की जगह मंदिर बताया गया था।


add

अपडेट न्यूज


भारत से सुपरहिट
Beautiful cake stands from Ellementry

Ellementry

© Copyright 2019 | Vanik Times. All rights reserved