दिल्ली में भीषण गर्मी और लू से खतरे में पक्षियों का जीवन,गिर रहे हैं आसमान से,रोज 100 से ज्यादा आ रहे अस्पतालों में इलाज के लिए


दिल्ली में भीषण गर्मी और लू से खतरे में पक्षियों का जीवन,गिर रहे हैं आसमान से,रोज 100 से ज्यादा आ रहे अस्पतालों में इलाज के लिए

मनोज बिसारिया | 21 May 2026

 

नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी और लू का कहर जारी है।लू के थपेड़ों और भीषण गर्मी मासूम पक्षियों का जीवन खतरे में पड़ गया है।आसमान में उड़ते समय सूर्य की तेज किरणें और गर्म हवाओं के थपेड़े उनके शरीर को इस कदर बेध रही हैं कि वे आसमान से सीधे जमीन पर गिर रहे हैं। आलम यह है कि प्रतिदिन 15 से 20 फीसदी पक्षियों की मौत हो जा रही है।

पक्षियों को ओआरएस और ग्लूकोज

राजधानी दिल्ली के पक्षी अस्पतालों में लू से प्रभावित बेसुध पक्षियों को बड़ी संख्या में लाया जा रहा है।इनका गला सूख रहा है,सांस लेना कठिन हो रहा है,उन्हें दस्त हैं और आंखों से पानी निकल रहा है।इलाज के लिए इन्हें ठंडे कमरों में रखा जा रहा है, जहां कूलर व पंखें से ठंडा रखने की व्यवस्था है। साथ ही इन पक्षियों को ओआरएस और ग्लूकोज दिया जा रहा है। अधिक गंभीर मामला होने पर विटामिन्स भी दिए जा रहे हैं, ताकि इनकी जान बचाई जा सके।

पक्षियों का बीमार पड़ने का सिलसिला तेज 

चांदनी चौक के लाल जैन मंदिर के चिकित्सक डाॅक्टर रामेश्वर यादव के मुताबिक गर्मी व लू के मामलों में तेजी आने के बाद से बीमार पक्षियों के आने का सिलसिला तेज हो गया है। स्थिति यह कि प्रतिदिन 100 से 120 पक्षी लाए जा रहे हैं, जिसमें मोर,कौए,कबूतर,ग्रीन पिजन,तोता और चील समेत सभी है। सबसे अधिक मामले कबूतरों के आ रहे हैं।

कई पक्षियों की हो जा रही है मौत

बता दें कि प्रतिदिन 70 से 75 कबूतर बीमार होकर आ रहे हैं।रोजाना 15 से 20 चील भी आ रहे हैं,इनका इलाज अस्पताल में हो रहा है।पक्षियों के सामान्य होने में 15 से 20 दिन लग जा रहा है। तब उन्हें खुले आकाश में छोड़ा जा रहा है। इस बीच 10 से 15 पक्षी ऐसे भी हैं, जिनकी इलाज के दौरान मौत भी हो जा रही है।

ठंडा कर रहे हैं फुहारों से वातावरण

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में वन्य जीवों को भीषण गर्मी और लू से बचाने के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने बाड़ों में ग्रीन मैट बिछाए हैं,जिससे धूप बाड़ों में न आ सके।बाघ,शुतुरमुर्ग सहित अन्य जानवरों के लिए वाटर स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया है, ताकि पानी की फुहारों के जरिए वातावरण ठंडा बना रहे।

किसी तरह की जानवरों को न हो परेशानी

इसके अलावा हाथी,व्हाइट टाइगर सहित अन्य जानवरों के बाड़ों में पानी के तालाब बनाने के साथ ही दिन में दो से तीन बार नहलाया जा रहा है। हर बाड़े में पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और जानवरों को नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, उसी हिसाब से व्यवस्थाओं को और बढ़ाया जाएगा, जिससे जानवरों को किसी तरह की परेशानी न हो।


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