नई दिल्ली।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय पांच देशों की यात्रा पर हैं।पीएम ने अपनी यात्रा की शुरुआत आज शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात से की।इस दौरान भारत और यूएई के बीच एनर्जी और डिफेंस समेत कई ऐतिहासिक समझौते हुए।वहीं इस दौरान दुबई की दिग्गज बैंकिंग ग्रुप एमिरेट्स एनबीडी को आरबीएल बैंक में बहुमत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए भारत सरकार और सभी संबंधित नियामक निकायों से अंतिम मंजूरी मिल गई।इसे भारत के वित्तीय क्षेत्र में सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक माना जा रहा है।
एमिरेट्स एनबीडी आरबीएल बैंक में 60 फीसदी हिस्सेदारी के लिए लगभग 95.9 करोड़ खरीदेगा शेयर
एमिरेट्स एनबीडी आरबीएल बैंक में 60 फीसदी हिस्सेदारी के लिए लगभग 95.9 करोड़ शेयर खरीदेगा। यह अधिग्रहण 280 रुपये प्रति शेयर की दर से तरजीही निर्गम के माध्यम से किया जाएगा।यह कुल सौदा लगभग 3 अरब डॉलर (करीब 26,850 करोड़ रुपये) का है। लगभग 3 अरब डॉलर का यह निवेश भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा इक्विटी फंड जुटाने वाला मामला है।
भारतीय बैंकिंग में पहली बार हुआ ऐसा
यह पहला मौका है जब किसी विदेशी बैंकिंग संस्थान को भारत के किसी मुनाफे में चल रहे बैंक में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दी गई है। ओपन ऑफर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरबीएल बैंक में एमिरेट्स एनबीडी की कुल हिस्सेदारी 51 फीसदी से 74 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है।
आरबीएल बैंक का बदल जाएगा स्टेटस
सौदे के पूरा होने पर एमिरेट्स एनबीडी को आरबीएल बैंक के प्रोमोटर के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।आरबीएल बैंक अब भारतीय रिजर्व बैंक के ढांचे के तहत एक विदेशी बैंक सहायक कंपनी के रूप में काम करेगा।भविष्य में एमिरेट्स एनबीडी की मुंबई, चेन्नई और गुरुग्राम स्थित भारतीय शाखाओं का आरबीएल बैंक में विलय कर दिया जाएगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह डील
एमिरेट्स एनबीडी ग्रुप के सीईओ शेन नेल्सन ने कहा कि इस मंजूरी के साथ उनका बैंक संयुक्त अरब अमीरात और भारत के बीच व्यापार, संपत्ति और निवेश के गलियारे के केंद्र में आ गया है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक एमिरेट्स एनबीडी की कुल संपत्ति करीब 327 अरब डॉलर है और यह 13 देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है। इस निवेश से आरबीएल बैंक की पूंजीगत स्थिति बेहद मजबूत होगी और भारत-यूएई आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई मिलेगी।