नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नालों की सफाई से लेकर यमुना को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर रेखा गुप्ता सरकार भले ही तमाम दावे कर रही हों,लेकिन धरातल पर सच कुछ और ही है।सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने संयुक्त बाढ़ प्रबंधन समिति की सिफारिशों के संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में ताजा रिपोर्ट दाखिल की है।
जेएफएमसी ने रिपोर्ट में यमुना में अतिक्रमण को एक गंभीर समस्या बताने के साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी पर चिंता व्यक्त की है।रिपोर्ट में कहा गया है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण एक गंभीर समस्या बनी हुई है और इस पर प्रभावी कार्रवाई करने के लिए एक नोडल एजेंसी द्वारा एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि इसमें दिल्ली मेट्रो,डीडीए, लोक निर्माण विभाग,आइएफसीडी,दिल्ली जल बोर्ड और यमुना नदी में निर्माण कार्य करने वाली अन्य सरकारी एजेंसियों को शामिल किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा कि वर्ष 2023 की बाढ़ असामान्य वर्षा (1978 की तुलना में 23.8 प्रतिशत अधिक) के कारण गंभीर हुई।
उक्त तथ्यों को देखते हुए एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डाॅक्टर अफरोज अहमद की पीठ ने आईएफसीडी को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व इसकी समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।साथ ही हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभागों और अपर यमुना नदी बोर्ड को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी।
रिपोर्ट में कहा गया कि बताया गया कि यमुना नदी पर एक वैज्ञानिक अध्ययन पुणे स्थित केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र (सीडब्ल्यूपीआरएस) द्वारा किया जा रहा है और यह 31 अगस्त 2026 तक पूरा होगा। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में दीवार के निर्माण सहित अल्पकालिक उपाय लागू किए गए हैं।
दिल्ली समेत एनसीआर में जल निकासी नेटवर्क का रखरखाव अलग-अलग एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है और इन नालों के संचालन के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच कोई तालमेल नहीं है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इन नालों के संचालन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा सकती है,जिसमें स्पष्ट दिशानिर्देश हों और यह बताया गया हो कि यमुना नदी में जल स्तर के आधार पर इन नालों को संचालित करने के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन किया जाना है।
रिपोर्ट में यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में नालों के लिए एक समान एसओपी को लागू करने की जिम्मेदारी एक समग्र समन्वय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।
समिति ने रिपोर्ट में कहा कि राज्य सरकार की कई एजेंसियां हैं,जो यमुना नदी पर बने बैराजों के संचालन में शामिल हैं और इनके बीच तालमेल की कमी है। समिति ने कहा कि सभी बैराजों का समन्वित और एकीकृत तरीके से संचालन करने के लिए सभी हितधारकों के बीच एक प्रभावी संचार प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए।
दिल्ली सरकार का आईएफसीडी विभाग नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर सकता है, जो बाढ़ के समय यमुना नदी पर बने विभिन्न बैराजों के संचालन के लिए जिम्मेदार होगा। समिति ने रिपोर्ट में यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वर्षा और जल प्रवाह मापने वाले उपकरण (रेन गेज, गेज, करंट मीटर, स्टाप वाच, नाव, ब्रिज आउटफिट, केबल टावर और ट्रालियां आदि) ठीक से काम कर रहे हों।
विभिन्न आंकड़ों को वास्तविक समय में भेजने के लिए वायरलेस नेटवर्क, इंटरनेट सुविधाएं, वीडियो कान्फ्रेंसिंग, फोन, मोबाइल फोन और टेलीमेट्री सिस्टम जैसी संचार प्रणालियां हर समय तैयार स्थिति में होनी चाहिए।