राजधानी दिल्ली में पानी के टैंकरों पर तीसरी आंख का पहरा, बिना जीपीएस नहीं उतरेंगे वाहन


राजधानी दिल्ली में पानी के टैंकरों पर तीसरी आंख का पहरा, बिना जीपीएस नहीं उतरेंगे वाहन

मनोज बिसारिया | 09 Apr 2026

 

नई दिल्ली।एनजीटी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पानी की चोरी और अवैध दोहन रोकने के लिए बेहद सख्त कदम उठाया है।अब दिल्ली जल बोर्ड के अंतर्गत चलने वाले सभी पानी के टैंकरों पर जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा चाहे वे जमीन का पानी ढो रहे हों या एसटीपी का साफ किया हुआ पानी।एनजीटी ने टैंकरों को किसी भी तरह की छूट देने से इनकार कर दिया है ताकि एसटीपी के पानी की आड़ में भू-जल की अवैध सप्लाई ना हो सके।टैंकर चालकों को जांच के दौरान गेट पास और जरूरी दस्तावेज दिखाना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर टैंकर जब्त किए जा सकते हैं और मालिकों चालकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी ने प्रशासन को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है।

शुद्ध पानी वाले सभी टैंकरों पर होगा लागू

एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी में सभी पानी के टैंकरों में जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य है,इसका पूरा रिकॉर्ड भी रखा जाए।एनजीटी ने स्पष्ट किया कि यह नियम भू-जल ले जाने वाले या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का शुद्ध पानी ढोने वाले सभी तरह के टैंकरों पर लागू होगा। आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान टैंकर चालकों को संबंधित दस्तावेज दिखाना भी जरूरी होगा।

जरूरी है निगरानी 

कुछ पक्षों ने मांग की थी कि एसटीपी के साफ पानी की आपूर्ति करने वाले टैंकरों को इस नियम से छूट दी जाए, लेकिन एनजीटी ने इसे खारिज कर दिया। एनजीटी का कहना है कि भले ही एसटीपी का पानी पर्यावरण के लिए उपयोगी है और उसके पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए,लेकिन निगरानी के बिना इसका दुरुपयोग भी हो सकता है।

ढिलाई बर्दाश्त नहीं

बिना जीपीएस के कुछ लोग एसटीपी के पानी के नाम पर अवैध रूप से भू-जल की आपूर्ति कर सकते हैं। इससे पहले 28 मई 2025 के आदेश में भी एनजीटी ने व्यावसायिक रूप से पानी की आपूर्ति करने वाले सभी टैंकरों में जीपीएस लगाने और अवैध भू-जल दोहन पर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हाल ही के आदेश में इन निर्देशों को अधिक स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई 

मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी,जिसमें आरोप लगाया गया था कि बिना अनुमति बोरवेल चलाकर व्यावसायिक स्तर पर भू-जल निकाला जा रहा है और टैंकरों के जरिए आसपास के इलाकों में आपूर्ति की जा रही है। इस पर एनजीटी ने एक समिति बनाकर जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए।

नियमों के उल्लंघन पर जब्त हो सकते हैं टैंकर

एनजीटी ने यह भी निर्देश दिया कि नियमों का उल्लंघन करने पर टैंकर जब्त किए जा सकते हैं और आपराधिक मामले दर्ज होंगे।साथ ही ड्राइवरों के पास गेट पास और ट्रांजिट पास जैसे जरूरी दस्तावेज होना अनिवार्य है। जांच के दौरान दस्तावेज नहीं दिखाने पर चालक और मालिक दोनों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। एनजीटी ने टैंकर ऑपरेटरों की याचिका खारिज करते हुए अपने निर्देशों के पालन के लिए आदेश की कॉपी मुख्य सचिव, दिल्ली जल बोर्ड और पुलिस आयुक्त को भेज दी है।


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