रामनवमी पर प्रभु श्रीराम को अर्पण करने के लिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि से भेजा गया 450 प्रसाद


रामनवमी पर प्रभु श्रीराम को अर्पण करने के लिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि से भेजा गया 450 प्रसाद

धनंजय सिंह | 23 Mar 2026

 

अयोध्या।उत्तर प्रदेश के मथुरा के भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि से रामनवमी पर प्रभु श्रीराम को अर्पण करने के लिए सोमवार सुबह प्रसाद अयोध्‍या भेजा गया।सुबह एक सजे-धजे वाहन में विधिपूर्वक हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।भक्ति गीत और मंत्रोच्चार के साथ एक जुलूस भी निकाला गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

बता दें कि 11 मन धनिया की पंजीरी,सवा मन लड्डू,वस्त्र, फल आदि साम्रगी एक सजे-धजे वाहन में अयोध्या भेजी गई।रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से प्रभु श्रीराम का भोग लगाया जाएगा।

रामनगरी में बढ़ने लगी श्रद्धालुओं की भीड़

रामनवमी मेला के चौथे दिन राम नगरी अयोध्या में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है।श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन के और रामकथा प्रवचनों के अलावा विभिन्न स्थानों पर चल रहे यज्ञ-अनुष्ठानो में शामिल हो रहे हैं।वैष्णव मंदिरों में श्रीराम जन्म का उल्लास बधाई गीतों और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से छलक रहा है।राम मंदिर में बंगलुरु की दिव्याशरी वाटि जी नृत्योदय अकादमी (भरत नाट्यम) से आई 39 मातृशक्तियों ने शनिवार को सायंकाल श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर की यज्ञशाला में नृत्य स्तुति कर आराध्य को अपनी कला समर्पित की।

कनक भवन और जानकी महल सहित अन्य मंदिरों में भी बधाई गान

दो घंटे की नृत्य स्तुति के उपरान्त सभी ने प्रभु श्रीराम का दर्शन पूजन किया।देर रात कलाकारों ने श्रीराम जन्मभूमि के निकट श्रृंगेरी मठ में देर रात तक अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर किया। उधर कालेराम मंदिर स्वर्गद्वार में चल रहे नव सांवत्सरिक महोत्सव के अवसर पर महाराष्ट्र के शास्त्रीय संगीतज्ञों के अलावा अयोध्या की मंदिर परम्परा के गायक कलाकारों ने भी जुगलबंदी से समां बांध दिया। वहीं कनक भवन और जानकी महल सहित अन्य मंदिरों में भी बधाई गान का सिलसिला चल रहा है।

26 मार्च को विठु माऊली वाद्य पथक,नागपूर की ओर से प्रस्तुति

25 मार्च को द अनहद नागपुर आधारित म्यूजिकल बैंड का कार्यक्रम होगा।सायंकाल होने वाले इस कार्यक्रम में पुराने गीतों का आधुनिक संगीत के साथ रीमिक्स कार्यक्रम प्रस्तुत (जिसे भजन जेमिनी नाम दिया गया है) किया जाएगा।युवा उत्साही कलाकारों ने जुनून,एकता और रचनात्मकता से ऐसी ध्वनि तैयार की है जो अनहद नाद अर्थात शाश्वत संगीत का बेहतरीन नमूना है। 26 मार्च को विठु माऊली वाद्य पथक, नागपूर की ओर से प्रस्तुति दी जाएगी। महाराष्ट्र में ढोल ताशा पथक का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व है। यह महाराष्ट्र की वीरतापूर्ण परंपरा से जुड़ा है, जो अब गणेशोत्सव में उत्साह का प्रतीक है।


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