स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को होगी जेल या मिलेगी बेल, इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनाई कल,हाईकोर्ट पर टिकी सबकी नजर


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को होगी जेल या मिलेगी बेल, इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनाई कल,हाईकोर्ट पर टिकी सबकी नजर

धनंजय सिंह | 26 Feb 2026

 

वाराणसी।इलाहाबाद हाईकोर्ट में कल शुक्रवार को जोशी मठ के वर्तमान और 46वें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई होगी।पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच शुक्रवार को दोपहर बाद इस याचिका पर सुनवाई करेगी।केस की संवेदनशीलता को देखते हुए कानूनी गलियारों में इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह बताया निराधार 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार और सत्ता का षड्यंत्र बताया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाया कि जांच में शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज पुलिस के साथ क्यों मौजूद है,पीड़ित बताए जा रहे बच्चे लंबे समय से आशुतोष के पास ही रह रहे हैं और उनके साथ कर्मकांड कर रहे हैं,जिसके सबूत अदालत में पेश किए जाएंगे। 17 जनवरी की कथित घटना को अविमुक्तेश्वरानंद ने पूरी तरह झूठा करार दिया।

अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर साधा निशाना 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रदेश में अपराधियों का बोलबाला है और अपराधी ही पुलिस की जांच रिपोर्ट मीडिया को बता रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हमेशा कानून के राज की बात की है, चाहे वह अतीक अहमद की हत्या का मामला हो या धर्म की रक्षा का।

अविमुक्तेश्वरानंद ने लगाया आरोप 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि पूर्व की सरकारों (सपा-बसपा) ने विरोध होने पर अपनी गलतियां मानी थीं, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार बुलडोजर संस्कृति और अहंकार के साथ आवाज उठाने वालों को दबा रही है। अविमुक्तेश्वरानंद ने साधु-संतों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि जब शंकराचार्य के साथ ऐसा हो रहा है, तो आम संतों का क्या होगा।

मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला 

बता दें कि कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में दर्ज मामले ने तूल पकड़ लिया है।डीके फाउंडेशन की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केस संख्या 4177/in/2026 दर्ज कर लिया है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक हिस्ट्रीशीटर की तहरीर पर बिना ठोस सबूतों के पुलिस की शक्ति का दुरुपयोग कर स्वामी के विचारों को दबाने और उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस संबंध में जल्द ही नोटिस जारी कर सकता है।

हाई कोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें 

बता दें कि 24 गफरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है।प्रयागराज के झूंसी थाने में 21 फरवरी को इनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
इस मामले में अविमुक्तेश्वरानंद,मुकुंदानंद और 2-3 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि विवेचना जारी रहने तक उन्हें राहत प्रदान की जाए।यह याचिका सीधे तौर पर पुलिस की संभावित दंडात्मक कार्रवाई और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर पेश की गई है।


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