राष्ट्रपति भवन में एडविन लुटियंस की जगह राजगोपालाचारी की लगाई गई प्रतिमा


राष्ट्रपति भवन में एडविन लुटियंस की जगह राजगोपालाचारी की लगाई गई प्रतिमा

मनोज बिसारिया | 23 Feb 2026

 

नई दिल्ली।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन के केंद्रीय प्रांगण में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की जगह देश के पहले गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।इस समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्री उपस्थित थे।साथ ही राजाजी उत्सव मनाया गया। 24 फरवरी से 1 मार्च तक राजगोपालाचारी पर एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 131वें एपिसोड के दौरान इस बदलाव का जिक्र किया था।

जानें क्यों किया गया बदलाव

इस बदलाव के पीछे केंद्र सरकार देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने और औपनिवेशिक युग की विरासत को खत्म करने का संदेश दे रही है।साथ ही भारतीय नेतृत्व से जुड़े प्रमुख चेहरों की प्राथमिकता पर जोर दे रही है।

राष्ट्रपति ने एक्स पर पोस्ट कर कहा....

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह कदम औपनिवेशिक सोच की निशानियों को खत्म करने और भारत की सांस्कृतिक विरासत और देश की खास सेवा करने वाले नेताओं के योगदान को अपनाने की चल रही कोशिशों का हिस्सा है।

कौन थे राजगोपालाचारी 

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को राजाजी के नाम से जाना जाता है। राजाजी का जन्म 10 दिसंबर 1878 को मद्रास प्रेसीडेंसी में हुआ था। राजाजी ने 1948 में लॉर्ड माउंटबेटन का स्थान लिया और 1950 में कार्यालय समाप्त होने तक भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल के रूप में सेवाएं दीं।राजाजी महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी थे।असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में भाग लिया था।इसके साथ ही गांधीजी के जेल जाने के दौरान यंग इंडिया का संपादन किया और बाद में वर्ष 1959 में स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की। राजाजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे, जब बंगाल प्रांत को दो भागों में बांटा गया था।राजनीति से इतर राजाजी ने रामायण और महाभारत का अंग्रेजी और तमिल में अनुवाद किया। राजाजी को वर्ष 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।


add

अपडेट न्यूज


भारत से सुपरहिट
Beautiful cake stands from Ellementry

Ellementry

© Copyright 2019 | Vanik Times. All rights reserved