दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा-कुंडली न मिलने के कारण शारीरिक संबंध के बाद शादी से मना करना अपराध


दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा-कुंडली न मिलने के कारण शारीरिक संबंध के बाद शादी से मना करना अपराध

मनोज बिसारिया | 23 Feb 2026

 

नई दिल्ली।दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को दुष्कर्म के एक मामले में जमानत याचिका खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की।एक आरोपित की जमानत याचिका खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के बाद कुंडली न मिलने की वजह से शादी से मना करने पर भारतीय न्याय संहिता का की धारा-69 के तहत धोखे से शारीरिक संबंध बनाने का अपराध बनता है।न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि आरोपित ने पीड़ित को बार-बार भरोसा दिलाया था कि उनकी शादी में कुंडली से लेकर कोई रुकावट नहीं है। ऐसे में इस स्तर पर आरोपित का बर्ताव बीएनएस की धारा-69 के तहत अपराध है।

दुष्कर्म के मामले में आरोपित की जमानत याचिका खारिज

चार जनवरी से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आरोपित की जमानत याचिका खारिज कर दी।आरोपित ने यह तर्क देते हुए जमानत की मांग की थी कि रिश्ता आपसी सहमति से था और दोनों एक-दूसरे को आठ साल से जानते थे।

बीएनएस की धारा- 69 के तहत दर्ज हुआ था केस

आरोपित ने तर्क दिया कि शादी का झूठा बहाना बनाकर दुष्कर्म करने का मामला नहीं बनता।हालांकि जमानत देने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता ने पहली शिकायत नवंबर 2025 में दर्ज कराई थी,लेकिन आरोपित और उसके परिवार द्वारा शादी का भरोसा दिए जाने पर ही वापस ले ली गई थी। हालांकि बाद में कुंडली न मिलने के आधार पर शादी करने से मना कर दिया गया था।इस मामले में बीएनएस की धारा- 69 के तहत दर्ज किया गया था। अदालत ने कहा कि घटना क्रम से पता चलता है कि यह सिर्फ रिश्ते खराब होने का मामला नहीं था,बल्कि आवेदक को अपने परिवार के कुंडली-मिलान पर जोर देने के बारे में पता होने के बावजूद बार-बार शादी का भरोसा दिलाने का मामला था।पहले दिए गए भरोसे के बावजूद कुंडली न मिलने के आधार पर शादी से इन्कार करना प्रथम दृष्टया आरोपित के व्यवहार पर सवाल उठाता है। अदालत ने कहा कि मामले में अभी आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ है,ऐसे में जमानत देने का आधार नहीं बनता है।


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